जयपुर: जयपुर नगर निगम कार्यालय में भ्रष्टाचार का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। कोटा ACB की टीम ने 2 जुलाई को मैरिज रजिस्ट्रार विक्रम सिंह और राकेश चौधरी नामक एक दलाल को 12,500 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों दबोच लिया। यह कार्रवाई तब हुई जब आरोपी आर्य समाज मंदिर में होने वाली शादियों के पंजीयन की एवज में अवैध वसूली कर रहे थे।
दलाल का खेल और निगम से कनेक्शन
जांच में खुलासा हुआ कि दलाल राकेश चौधरी पहले नगर निगम के मैरिज रजिस्ट्रार ऑफिस में ठेके पर कार्यरत था। 15 जून को उसे हटाए जाने के बावजूद उसका निगम कार्यालय में आना-जाना और पैठ बनी हुई थी। उसने निगम से कुछ दूरी पर ही अपना निजी मैरिज ब्यूरो खोल लिया था और लगातार रजिस्ट्रार विक्रम सिंह के संपर्क में था। दोनों के मोबाइल चैट्स से पता चला है कि वे नए रजिस्ट्रेशन पर रिश्वत की रकम 2,500-3,000 रुपये से घटाकर 1,000 रुपये प्रति केस लेने पर सहमत हुए थे, जबकि सरकारी निर्धारित शुल्क केवल 110 रुपये है।
ACB की कार्रवाई और बचाव की कोशिशें
ACB डीएसपी अनीस अहमद ने बताया कि ट्रैप के दिन आरोपी राकेश को जयपुर ACB की कार्रवाई की भनक लग गई थी। उसने इसका स्क्रीनशॉट रजिस्ट्रार विक्रम सिंह को भेजा था, लेकिन मीटिंग में होने के कारण विक्रम ने फोन स्विच ऑफ कर रखा था। कुछ ही घंटों बाद कोटा ACB ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया। मौके पर तलाशी के दौरान आरोपियों के पास से 38,000 रुपये की संदिग्ध नकदी भी बरामद हुई है।
क्यों परेशान किए जाते थे परिवादी?
एडिशनल एसपी विजय स्वर्णकार के अनुसार, परिवादी ने शिकायत की थी कि आर्य समाज मंदिर, प्रताप नगर में गरीब और दहेज रहित शादियां करवाई जाती हैं। आरोपी अधिकारी और दलाल रिश्वत न देने पर डॉक्यूमेंट में कमियां निकालने का बहाना बनाकर लोगों को परेशान करते थे। रिश्वत मांगने की पुष्टि होने के बाद ACB ने जाल बिछाकर दोनों को ट्रैप किया। फिलहाल दोनों आरोपी न्यायिक अभिरक्षा में जयपुर जेल में बंद हैं और उनसे गहन पूछताछ की जा रही है।