जगन गुर्जर लव स्टोरी: पिता की मौत के बाद बीहड़ उतरी थी कोमेश, चंबल के खूंखार डाकू की तीसरी पत्नी बनी; जानें क्राइम और लव की पूरी कहानी

Desk

राजस्थान की सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में सोमवार को एक खौफनाक अध्याय का हमेशा के लिए अंत हो गया। चंबल के बीहड़ों में करीब दो दशकों तक दहशत का पर्याय रहे पूर्व इनामी डकैत जगन गुर्जर की जेल के भीतर ही गला घोंटकर हत्या कर दी गई। भरतपुर के कुलदीप जघीना हत्याकांड के आरोपी और उसी बैरक में बंद हार्डकोर अपराधी विष्णु ने तौलिए (गमछे) से जगन का गला घोंट दिया। हत्या, लूट, अपहरण और डकैती के 128 से ज्यादा मुकदमों का बोझ ढोने वाले इस खूंखार डाकू की क्राइम फाइल जितनी खौफनाक है, उसकी लव स्टोरी भी उतनी ही दिलचस्प और फिल्मी रही है।

जगन गुर्जर और महिला दस्यु कोमेश की प्रेम कहानी

धौलपुर के भवूतीपुरा गांव का रहने वाला जगन गुर्जर शुरुआत में दूध बेचता था और उसके पिता शिवचरण गुर्जर एक स्थानीय मंदिर में पूजा-पाठ करते थे। निजी रंजिश और जीजा की हत्या का बदला लेने के लिए बीहड़ में उतरे जगन ने अपराध की दुनिया में अपना खौफ कायम किया। इसी बीच उसकी जिंदगी में ‘कोमेश’ नाम की एक महिला की एंट्री हुई। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, कोमेश के पिता की हत्या कर दी गई थी, जिसका बदला लेने के लिए वह चंबल के बीहड़ में चली गई और महिला दस्यु बन गई। बीहड़ की इन्हीं सुनसान पगडंडियों पर जगन और कोमेश की मुलाकात हुई और दोनों के बीच प्रेम प्रसंग शुरू हो गया। कोमेश, जगन गुर्जर की तीसरी पत्नी बनी।

उनकी लव स्टोरी ने उस समय काफी सुर्खियां बटोरी थीं, जब कोमेश बीहड़ में ही गर्भवती हो गई थी। बताया जाता है कि डिलीवरी का समय नजदीक आने पर वह ऊंट पर सवार होकर हथियारों के साये में बीहड़ से हिंडौन पहुंची, जहां एक निजी अस्पताल में उसने बच्चे को जन्म दिया और कुछ दिन बाद वापस बीहड़ लौट गई। साल 2008 में पुलिस के साथ हुई एक मुठभेड़ में कोमेश के पैर में गोली लग गई थी, जिसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। जगन की कुल तीन पत्नियां—ममता, मुकेश और कोमेश थीं। साल 2017 में जब जगन जेल से बाहर था, तब उसने अपनी पहली पत्नी ममता को धौलपुर विधानसभा से निर्दलीय उपचुनाव भी लड़वाया था, हालांकि डकैत छवि के कारण उसे करारी हार का सामना करना पड़ा।

वो खौफ, जिससे 10 साल तक गांवों में नहीं बजी शहनाई

जगन ने अपनी पत्नी और तीन भाइयों (लाल सिंह, पान सिंह और पप्पू गुर्जर) के साथ मिलकर एक ऐसा मजबूत गैंग तैयार किया था, जिसने राजस्थान, मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश के चंबल इलाकों में दहशत फैला दी थी। साल 2005 तक उसका खौफ इस कदर था कि डकैती और अपहरण के डर से डांग इलाके के कई गांवों में लगभग 10 सालों तक लोगों ने अपनी बेटियों की शादियां तक नहीं कीं। खुद जगन के गांव में भी एक दशक तक कोई शहनाई नहीं बजी और उसके पिता तक को गांव छोड़कर भागना पड़ा था।

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सीएम का महल उड़ाने की धमकी और संसद में उठी एनकाउंटर की मांग

जगन गुर्जर पूरे देश की सुर्खियों में तब आया, जब साल 2008 में गुर्जर आंदोलन के दौरान उसने तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के धौलपुर स्थित ‘पैलेस’ को बम से उड़ाने की सीधी धमकी दे डाली। इसके बाद पुलिस ने उस पर 11 लाख रुपए का इनाम घोषित कर दिया था। अपराध की दुनिया में जगन देश का पहला ऐसा डाकू था, जिसके एनकाउंटर की मांग देश की संसद में उठी थी। जून 2019 में आरएलपी सांसद हनुमान बेनीवाल ने लोकसभा में कहा था कि महिलाओं को निर्वस्त्र घुमाने और व्यापारियों को पीटने वाले इस खूंखार डकैत का तुरंत एनकाउंटर किया जाना चाहिए।

4 बार किया सरेंडर, 3 रुपए के लिए किया बवाल

एनकाउंटर के खौफ से जगन गुर्जर ने अपनी जिंदगी में चार बार आत्मसमर्पण किया। पहली बार 2001 में प्रेमिका कोमेश के चक्कर में तत्कालीन एसपी बीजू जॉर्ज जोसफ के सामने, दूसरी बार 2009 में सचिन पायलट के सामने, तीसरी बार 2018 में आईजी मालिनी अग्रवाल के सामने और चौथी बार 2022 में करौली पुलिस के समक्ष।

हैरानी की बात यह रही कि करोड़ों की फिरौती मांगने वाला यह डाकू अपने आखिरी दिनों में 3-3 रुपए जैसी छोटी बातों पर उलझने लगा था। साल 2019 में उसने अस्पताल के बाहर पानी के पाउच के 3 रुपए खुल्ले मांगने पर एक दुकानदार को सरेआम पीटा और बंदूक लहराई। इसके कुछ दिन बाद पंचर ठीक से न बनाने पर उसने पंचर वाले के साथ मारपीट की। अब अजमेर की हाई सिक्योरिटी जेल में हुई इस हत्या ने चंबल के एक बड़े और खौफनाक अध्याय का हमेशा के लिए अंत कर दिया है, लेकिन जेल प्रशासन की सुरक्षा पर एक गहरा दाग भी छोड़ दिया है।

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