राजस्थान के सीकर जिले में सरकारी गोचर भूमि की कथित अवैध रजिस्ट्री को लेकर मचे बवाल के बीच भजनलाल सरकार ने कड़ा एक्शन लिया है। राज्य के राजस्व विभाग ने फतेहपुर के तहसीलदार हितेश चौधरी को तत्काल प्रभाव से निलंबित (सस्पेंड) कर दिया है। जारी आदेशों के अनुसार, निलंबन अवधि के दौरान हितेश चौधरी को अजमेर स्थित राजस्व मंडल मुख्यालय में अपनी उपस्थिति दर्ज करानी होगी। हालांकि, राजस्व विभाग की ओर से जारी आधिकारिक निलंबन पत्र में कार्रवाई के स्पष्ट कारणों का कोई जिक्र नहीं किया गया है, लेकिन इसे सीधे तौर पर फतेहपुर के बहुचर्चित ‘पिंजरापोल गोचर भूमि विवाद’ से जोड़कर देखा जा रहा है।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के सीधे निर्देशों पर हुई इस कार्रवाई को प्रदेश सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस पॉलिसी’ के एक बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है। गौरतलब है कि स्थानीय नागरिक और गोभक्त पिछले 4 महीनों से इस मामले में दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे थे। चूंकि विभागीय स्तर पर चल रही जांच का कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आ रहा था, जिससे आमजन में भारी आक्रोश पनप रहा था। हाल ही में फतेहपुर के पिंजरापोल गौशाला मामले को लेकर स्थानीय भाजपा पदाधिकारियों ने भी तहसीलदार की कार्यशैली पर कड़ा ऐतराज जताया था और जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर सख्त कार्रवाई का अल्टीमेटम दिया था।
फरवरी में सुर्खियों में आया था 1100 बीघा जमीन का खेल
यह पूरा विवाद इसी साल फरवरी 2026 में तब सुर्खियों में आया, जब फतेहपुर के कसेरा बीहड़ क्षेत्र में स्थित लगभग 1100 बीघा बेशकीमती गोचर भूमि की कथित रूप से गुपचुप रजिस्ट्री कर दी गई। संबंधित राजस्व अधिकारियों पर आरोप लगे थे कि उन्होंने नियमों की खुलकर अनदेखी करते हुए सरकारी गोचर भूमि को निजी लोगों के नाम पर चढ़ा दिया। इस अवैध रजिस्ट्री के सामने आते ही कस्बे के गोभक्त और स्थानीय भाजपा नेता जमीन को बचाने के पक्ष में लामबंद हो गए थे। विरोध इतना उग्र था कि गोचर भूमि को सुरक्षित रखने की मांग के समर्थन में फतेहपुर कस्बे का पूरा बाजार अनिश्चितकाल के लिए बंद रहा था, तभी से यह प्रशासनिक मुद्दा गरमाया हुआ था।
एसडीएम के ट्रांसफर से संतुष्ट नहीं थे संगठन के नेता
भाजपा नेताओं की लगातार शिकायतों के बावजूद लंबे समय तक किसी भी जिम्मेदार अधिकारी पर सीधी कार्रवाई न होने से संगठन के भीतर भी नाराजगी का माहौल था। करीब डेढ़ महीने पहले विगत 13 मई को तत्कालीन एसडीएम (SDM) दमयंती कंवर का फतेहपुर से ट्रांसफर कर दिया गया था। हालांकि, स्थानीय भाजपाई और प्रदर्शनकारी इसे गोचर भूमि मामले से जुड़ी सजा मानने को तैयार नहीं थे; उनका तर्क था कि सरकार ने दमयंती कंवर को बीकानेर नगर निगम में डिप्टी कमिश्नर जैसे महत्वपूर्ण पद पर लगाया है, जो कार्रवाई की श्रेणी में नहीं आता। अब जमीनी स्तर पर बढ़ते असंतोष और मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने आखिरकार सख्त रुख अपनाते हुए तहसीलदार हितेश चौधरी को सस्पेंड कर जनता को शांत करने का प्रयास किया है।