RGHS स्कीम में अब नहीं चलेगा फर्जीवाड़ा: मरीजों को मिलेगी राहत

Madhu Manjhi

राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) में फर्जी बिलिंग और कथित अनियमितताओं को लेकर राज्य सरकार पूरी तरह सख्त मोड में आ गई है। विभागीय ऑडिट के दौरान सामने आया कि योजना के पैनल में शामिल कुछ फार्मेसियों और अस्पतालों द्वारा दावों (क्लेम) में दवाओं की बाजार से ज्यादा एमआरपी दिखाई जा रही है। यही नहीं, एक ही दवा के अलग-अलग क्लेम में कीमतों का बड़ा अंतर और कृत्रिम रूप से दाम बढ़ाने (Artificial Price Hike) जैसी गंभीर गड़बड़ियां पकड़ी गई हैं। इस फर्जीवाड़े से सरकारी खजाने पर पड़ रहे आर्थिक बोझ को रोकने के लिए सरकार ने नई और बेहद सख्त गाइडलाइन जारी कर दी है।

अस्पतालों के लिए बदले नियम: 12 घंटे में TID और 7 दिन में रिपोर्ट जरूरी

नई गाइडलाइन के अनुसार, अब पैनल में शामिल अस्पतालों की मनमानी नहीं चलेगी। उनके लिए निम्नलिखित कड़े नियम तय किए गए हैं:

  • डिजिटल रिकॉर्ड: अस्पतालों को अब मरीज के भर्ती (Admit) होने से लेकर उसके डिस्चार्ज होने तक का पूरा रिकॉर्ड डिजिटल रूप में मेंटेन करना होगा।
  • TID अनिवार्य: मरीज के अस्पताल में भर्ती होने के 12 घंटे के भीतर उसकी टीआईडी (TID) बनाना अनिवार्य कर दिया गया है।
  • जांच रिपोर्ट अपलोडिंग: मरीज की कोई भी मेडिकल जांच होने पर, उसकी रिपोर्ट को 7 दिन (एक हफ्ते) के भीतर पोर्टल पर अपलोड करना होगा।
  • गलत पैकेज पर रिजेक्शन: यदि मरीज के इलाज के पैकेज की राशि में कोई गड़बड़ी या गलत दावा पाया गया, तो क्लेम को तुरंत रिजेक्ट कर दिया जाएगा।
  • इलाज से मना करने पर कार्रवाई: यदि कोई भी सूचीबद्ध अस्पताल आरजीएचएस (RGHS) के मरीज का कैशलेस इलाज करने से मना करता है, तो उसे तुरंत योजना के पैनल से बाहर (De-panel) कर दिया जाएगा।

फार्मेसियों पर कसा शिकंजा: बिल, जीएसटी चालान और स्टॉक की होगी गहन जांच

दवा विक्रेताओं के लिए कड़े निर्देश: दवाओं के बिलों में होने वाले खेल को रोकने के लिए फार्मेसियों के दावों की गहन जांच और उनके बैच नंबर का भौतिक सत्यापन (Verification) किया जाएगा। अगर दवा की एमआरपी (MRP) में थोड़ा भी अंतर मिला, तो पूरा क्लेम रिजेक्ट हो जाएगा।

फार्मेसियों के लिए अनिवार्य शर्तें:

  • सभी खरीद बिल, जीएसटी चालान और स्टॉक रजिस्टर को सुरक्षित रखना होगा।
  • बिलिंग हमेशा नियमानुसार अनिवार्य छूट (Discount) के साथ ही करनी होगी।
  • यदि कोई फार्मेसी नकली, बढ़ा-चढ़ाकर बताए गए या बिना सत्यापन वाले दावे पेश करती है, तो उससे अतिरिक्त भुगतान की शत-प्रतिशत वसूली की जाएगी और उसे ब्लैकलिस्ट किया जाएगा।

आम जनता और पात्र लोगों को मिलेगी बड़ी राहत

अतिरिक्त कार्यकारी अधिकारी निधि पटेल का बयान: आरजीएचएस की अतिरिक्त कार्यकारी अधिकारी निधि पटेल के अनुसार, योजना की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। इस पूरी कवायद का सीधा फायदा उन पात्र कर्मचारियों और पेंशनर्स को मिलेगा जो ईमानदारी से योजना का लाभ ले रहे हैं। राहत की बात यह है कि इस नई गाइडलाइन में आम मरीजों पर कोई सख्ती नहीं की गई है, बल्कि केवल अस्पतालों और फार्मेसियों को जवाबदेह बनाया गया है।

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इससे सही दस्तावेज वाले मरीजों को बिना किसी देरी और मानसिक परेशानी के समय पर क्लेम मिल सकेगा। गौरतलब है कि पिछले दिनों आरजीएचएस योजना में बड़े स्तर पर फर्जीवाड़ा उजागर हुआ था, जिसके बाद कुछ डॉक्टरों और लैब संचालकों के खिलाफ एफआईआर (मुकदमे) भी दर्ज की गई थी। इसी को देखते हुए अब यह नई सख्ती लागू की गई है।

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