जयपुर। राजस्थान की सियासत में इन दिनों भाषा की मर्यादा और राजनीतिक शुचिता हाशिये पर नजर आ रही है। राजस्थान कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और भजनलाल सरकार के कैबिनेट मंत्री डॉ. किरोड़ीलाल मीणा के बीच पिछले कुछ दिनों से चल रहा घमासान अब और उग्र हो गया है। इस जुबानी जंग में अब सूबे के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर की एंट्री भी हो चुकी है, जिसके बाद यह लड़ाई ‘डोटासरा बनाम किरोड़ी’ से बढ़कर ‘डोटासरा बनाम दिलावर’ का रूप लेती दिख रही है। नेताओं के मुखारविंद से निकल रहे तीखे और अमर्यादित शब्द अब जनता के बीच उनके ही पद की गरिमा पर प्रश्नचिह्न लगा रहे हैं।
डोटासरा का तीखा हमला: ‘इतना मत छेड़ो कि बुढ़ापा खराब हो जाए’
इस सियासी संग्राम की शुरुआत तब हुई जब मंत्री किरोड़ीलाल मीणा ने पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा पर उनके रिश्तेदारों के सरकारी नौकरी में चयन को लेकर ओबीसी प्रमाण-पत्र (OBC Certificate) के मामले में गंभीर आरोप लगाए थे। इसके जवाब में डोटासरा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर न सिर्फ किरोड़ीलाल बल्कि पूरी भजनलाल सरकार को आड़े हाथों लिया। तैश में आए डोटासरा ने चेतावनी भरे लहजे में कहा, “किसी को इतना भी मत छेड़ो कि तुम्हारा बुढ़ापा ही खराब हो जाए।” उन्होंने दावा किया कि ये वही किरोड़ीलाल हैं जो पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार में अपने मुकदमे हटाने के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के पैरों में बैठ गए थे।
शिक्षा मंत्री मदन दिलावर की एंट्री: डोटासरा को बताया ‘महामूर्ख और बेईमान’
डोटासरा के इन आरोपों पर सूबे के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने मोर्चा संभाला और किरोड़ीलाल मीणा का बचाव करते हुए कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष पर बेहद तीखा हमला बोला। जयपुर के स्टेट ओपन स्कूल कार्यालय में मीडिया से बात करते हुए दिलावर ने डोटासरा को ‘महामूर्ख और बेईमान’ तक कह डाला। दिलावर ने डोटासरा के रवैये की तुलना करते हुए कहा, “जिस प्रकार कोई चरित्रहीन किसी पतिव्रता महिला पर आरोप लगाए, डोटासरा का रवैया भी वैसा ही है। डॉ. किरोड़ी लाल मीणा सोने की तरह खरे हैं और उनका सार्वजनिक जीवन पूरी तरह पारदर्शी रहा है।”
जांच एजेंसियों का दिया हवाला: मदन दिलावर ने कहा कि डोटासरा खुद भ्रष्टाचार के दलदल में डूबे हैं और जनता का ध्यान भटकाने के लिए दूसरों पर कीचड़ उछाल रहे हैं। उन्होंने कांग्रेस नेता महेश जोशी का उदाहरण देते हुए चेतावनी दी कि कानून अपना काम कर रहा है और आज खुद को बेगुनाह बताने वालों को भी जल्द ही जांच का सामना करना पड़ेगा।
विश्लेषण: क्या रसातल में जा रहा है राजनीति का स्तर?
चाहे जंग डोटासरा बनाम किरोड़ी की हो या फिर अब डोटासरा बनाम दिलावर की, राजस्थान की राजनीति में भाषा का जो स्तर देखने को मिल रहा है, वह चिंताजनक है। ‘महामूर्ख’, ‘चरित्रहीन’, ‘बुढ़ापा खराब करने’ जैसे शब्दों का सरेआम इस्तेमाल किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में गरिमामयी नहीं माना जा सकता। विकास, बेरोजगारी और जनता के मुद्दों पर बहस करने के बजाय सूबे के दिग्गज नेताओं का इस तरह व्यक्तिगत कीचड़ उछालना यह साफ दिखाता है कि राजनीतिक फायदे के लिए पदों की गरिमा को ताक पर रख दिया गया है।