प्रयोगशाला में सैंपल बदलने की खौफनाक साजिश! अब ‘लैब वाले डॉक्टर’ की तलाश में जुटी जांच एजेंसी

Madhu Manjhi

बीकानेर। कृषि महकमे और राज्य बीज निगम को हिलाकर रख देने वाले बहुचर्चित नकली बीज और ₹2.43 करोड़ के रिश्वतखोरी प्रकरण की विधिक जांच में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो को लगातार कई चौंकाने वाले और नए विधिक सुराग हासिल हो रहे हैं। जांच एजेंसी की कड़ाई के बाद अब तक इस पूरे सिंडिकेट में सबसे बड़ा रहस्य बने और एफआईआर (FIR) के पन्नों में दर्ज कोड-नेम ‘सतीश’ की आधिकारिक पहचान विधिक रूप से उजागर हो गई है। आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, कड़ियों को जोड़ने पर सामने आया है कि यह रहस्यमयी ‘सतीश’ कोई साधारण दलाल नहीं, बल्कि कृषि विस्तार विभाग, श्रीगंगानगर में संयुक्त निदेशक (Joint Director) के पद पर कार्यरत वरिष्ठ अधिकारी सतीश कुमार शर्मा हैं। इस विधिक खुलासे के बाद समूचे महकमे और सचिवालय में हड़कंप मच गया है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जब संयुक्त निदेशक सतीश कुमार शर्मा से उनका पक्ष जानने के लिए संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो उनका आधिकारिक मोबाइल नंबर पूरी तरह बंद (स्विच ऑफ) मिला और वे अपने मुख्यालय से विधिक रूप से भूमिगत हो चुके हैं।

लैब में सैंपल बदलने का ‘डॉक्टर नेक्सस’ और सांख्यिकीय साजिश

जांच एजेंसी की सर्विलांस विंग द्वारा न्यायालय में पेश की गई तकनीकी रिपोर्ट और कॉल इंटरसेप्शन के विधिक विश्लेषण से एक बेहद डरावनी और खौफनाक प्रशासनिक साजिश का खुलासा हुआ है:

  • सैंपल बदलने का खेल: गिरफ्तार किए गए बीज निगम के पूर्व निदेशक जुगल किशोर विश्नोई और बिचौलियों के बीच हुई वॉयस रिकॉर्डिंग में बार-बार एक ‘डॉक्टर साहब’ का जिक्र आ रहा है।
  • साजिश की क्रोनोलॉजी: यह डॉक्टर कोई चिकित्सक नहीं, बल्कि केंद्रीय बीज परीक्षण प्रयोगशाला (Seed Testing Laboratory) से जुड़ा एक वरिष्ठ विधिक तकनीकी विशेषज्ञ है। इस डॉक्टर के जरिए सरकारी लैब में आए नकली और अमानक बीजों के सैंपलों को असली और उच्च गुणवत्ता वाले सैंपलों से विधिक रूप से बदलवाने (Sample Swapping) की साजिश रची जा रही थी, ताकि नकली बीज बेचने वाली ब्लैक-लिस्टेड कंपनियों को विधिक ‘क्लीन चिट’ दिलाई जा सके। ब्यूरो अब इस डॉक्टर की विधिक लोकेशन ट्रेस कर रहा है।

₹20 लाख और ₹60 लाख का वित्तीय रहस्य अब भी बरकरार

इस महा-घूसकांड में पैसों के लेन-देन का जो सांख्यिकीय और विधिक वर्गीकरण सामने आया है, उसने ब्यूरो के आला अधिकारियों को भी चकरा दिया है, जिसकी विधिक पड़ताल जारी है:

संदिग्ध वित्तीय राशि (Bribe Bracket)विधिक स्टेटस और जांच की रडार (Investigation Status)
₹20,00,000 (बीस लाख रुपए)बिचौलियों की बातचीत के अनुसार यह रकम जयपुर के एक उच्च पदस्थ विधिक नीति-निर्माता अधिकारी तक पहुंचाई जानी थी। ब्यूरो उस ‘अंतिम लाभार्थी’ (End Beneficiary) का नाम उगलवाने में जुटी है।
₹60,00,000 (साठ लाख रुपए)विधायक के गिरफ्तार पीए (PA) गणपत विश्नोई से इस भारी सांख्यिकीय रकम को लेकर लंबी विधिक पूछताछ की गई है, लेकिन उसने अब तक इस राशि के स्रोत और संभावित विधिक उपयोग का रहस्य नहीं खोला है।

बीकानेर में छह दिग्गजों से सघन पूछताछ; डीआईजी डॉ. रामेश्वर सिंह खुद संभाल रहे कमान

भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के डीआईजी डॉ. रामेश्वर सिंह के निर्देशन में इस रैकेट के तारों को खंगाला जा रहा है, जिसके तार केवल श्रीगंगानगर और बीकानेर तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इसका मुख्यालय जयपुर सचिवालय से जुड़ा है। ब्यूरो इस महा-घूसकांड में अब तक छह प्रमुख आरोपियों— राज्य बीज निगम के पूर्व निदेशक जुगल किशोर विश्नोई, विधायक के पीए गणपत विश्नोई, सतपाल सिंह, सुनील सेठिया, किरण कापड़िया और स्वतंत्र कुमार ज्याणी को विधिक रूप से गिरफ्तार कर चुका है।

वर्तमान में इन सभी आरोपियों को बीकानेर चौकी के विशेष विधिक विंग में रखकर आमने-सामने बिठाकर गहन पूछताछ (Cross-Examination) की जा रही है। डीआईजी ने स्पष्ट किया कि डिजिटल साक्ष्यों, फोन की व्हाट्सएप चैट और बैंक खातों के फॉरेंसिक ऑडिट के आधार पर यह पता लगाया जा रहा है कि सैंपल बदलने की इस विधिक प्रक्रिया को किस स्तर तक प्रभावित किया जा चुका था और इसके कारण प्रदेश के कितने लाख मासूम किसानों को नकली बीज बांटे गए। ब्यूरो का साफ कहना है कि इस विधिक जांच की आंच में आने वाले किसी भी रसूखदार को बख्शा नहीं जाएगा।

Live Sach – तेज़, भरोसेमंद हिंदी समाचार। राजनीति, राजस्थान से ब्रेकिंग न्यूज़, मनोरंजन, खेल और भारत की हर बड़ी खबर!

Share This Article