राजस्थान संपर्क पोर्टल की ढिलाई बर्दाश्त नहीं; शिकायत निवारण अधिकारियों को दी जाएगी विशेष विधिक ट्रेनिंग

Madhu Manjhi

जयपुर। राजस्थान के प्रशासनिक तंत्र को अधिक पारदर्शी, गतिशील और उत्तरदायी बनाने के विधिक उद्देश्य से मंगलवार को शासन सचिवालय (Secretariat) के कॉन्फ्रेंस हॉल में एक अत्यंत महत्वपूर्ण उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास की अध्यक्षता में आयोजित ‘सचिवों की समिति’ (Committee of Secretaries) की इस बैठक में राज्य सरकार के सभी विधिक और प्रशासनिक विभागों के अतिरिक्त मुख्य सचिव (ACS), प्रमुख शासन सचिव तथा शासन सचिव मुस्तैदी से उपस्थित रहे। बैठक के दौरान राज्य सरकार द्वारा संचालित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की भौतिक प्रगति, बजटीय प्रावधानों के विरुद्ध स्वीकृत निधियों (Funds) के वास्तविक उपयोग तथा धरातल पर कार्यक्रमों के क्रियान्वयन की विस्तृत और सांख्यिकीय समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने विभिन्न योजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन पर संतोष व्यक्त करते हुए अधिकारियों को विधिक निर्देश दिए कि हर हाल में योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक पहुंचना सुनिश्चित किया जाए।

ई-फाइलों के विधिक स्तर होंगे कम; प्रशासनिक प्रक्रियाओं से हटेगा ‘टेबल-चक्कर’

बैठक में मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने ब्यूरोक्रेसी में फाइलों के अटकने और लटकने की प्रवृत्ति को समाप्त करने के लिए एक बड़ा विधिक व नीतिगत निर्देश जारी किया। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक प्रक्रियाओं में होने वाले अनावश्यक विलंब (Bureaucratic Red Tape) को पूरी तरह समाप्त करने के लिए ‘ई-फाइलों’ (e-Files) के निस्तारण की विधिक प्रक्रिया को और अधिक सरल व सुगम बनाया जाए।

उन्होंने सूचना प्रौद्योगिकी विभाग और प्रशासनिक सुधार विभाग को संयुक्त निर्देश दिए कि:

  • स्तरों की कटौती: एक ई-फाइल को सचिवालय में निर्णय तक पहुंचने के लिए जिन विभिन्न विधिक और लिपिकीय स्तरों (Levels) से होकर गुजरना पड़ता है, उनकी सांख्यिकीय संख्या को यथासंभव कम किया जाए।
  • त्वरित निर्णय: फाइलों के स्तर कम होने से निर्णय लेने की विधिक प्रक्रिया में अभूतपूर्व तेजी आएगी, जिससे राज्य का संपूर्ण प्रशासन अधिक दक्ष, त्वरित और जनता के प्रति जवाबदेह बन सकेगा। उन्होंने सभी विभागों को अपने यहां लंबित विधिक मामलों के शीघ्र निस्तारण पर विशेष फोकस करने के निर्देश दिए।

जनसहभागिता और जन शिकायत निवारण तंत्र का विधिक सुदृढ़ीकरण

बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने आमजन से सीधे सरोकार रखने वाले दो सबसे महत्वपूर्ण विधिक स्तंभों— जन अभियान और शिकायत पोर्टल पर विशेष कड़ाई बरती, जिसका विधिक विवरण इस प्रकार है:

1. वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान में आउटरीच

मुख्य सचिव ने ‘वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान’ जैसे जनभागीदारी आधारित महत्वाकांक्षी अभियानों में व्यापक जनसहभागिता सुनिश्चित करने हेतु प्रभावी जनजागरूकता और जनसंपर्क (Outreach) कार्यक्रम आयोजित करने के विधिक निर्देश दिए। उन्होंने रेखांकित किया कि जल संरक्षण जैसे संवेदनशील और जीवनदायिनी विषयों पर जब तक समाज की सक्रिय भागीदारी नहीं होगी, तब तक कोई भी अभियान विधिक रूप से सफल नहीं हो सकता। इसके लिए स्थानीय निकायों और पंचायती राज संस्थाओं के साथ व्यापक संवाद स्थापित किया जाएगा।

2. राजस्थान संपर्क पोर्टल का विधिक ऑडिट

आम जनता की शिकायतों के निवारण को लेकर सीएस ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने राजस्थान संपर्क पोर्टल (181 हेल्पलाइन) पर प्राप्त होने वाली आमजन की शिकायतों के समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण विधिक निस्तारण पर विशेष बल दिया। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि शिकायतों का निपटारा केवल कागजों में ‘डिस्पोज’ दिखाने के लिए न किया जाए, बल्कि पीड़ित को उचित विधिक माध्यम से धरातलीय न्याय मिलना चाहिए। इसके साथ ही, पोर्टल एवं हेल्पलाइन पर कार्यरत शिकायत निवारण अधिकारियों (Grievance Redressal Officers) को आधुनिक और व्यावहारिक विधिक प्रशिक्षण प्रदान करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि शिकायतों के समाधान की व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ हो सके। उन्होंने विधानसभा सत्र के मद्देनजर विभिन्न विधायकों द्वारा पूछे गए लंबित प्रश्नों के उत्तर भी पूरी विधिक सत्यता और तथ्यपरक रूप से शीघ्र उपलब्ध कराने की समय-सीमा तय की।

अंतर्विभागीय समन्वय और ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस की सराहना

बैठक के अंतिम चरण में विभिन्न विभागों की मासिक कार्य रिपोर्टों की गहन विधिक समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने सभी प्रशासनिक सचिवों को आपसी समन्वय की विधिक घुट्टी पिलाते हुए कहा कि अंतर्विभागीय विषयों (Inter-departmental issues) पर प्रभावी सहयोग और आपसी संवाद की कमी के कारण योजनाएं अटक जाती हैं, इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

इस दौरान मुख्य सचिव ने निवेश के क्षेत्र में राज्य सरकार की विधिक प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने के लिए प्रदेश की डी-रेगुलेशन सेल (De-regulation Cell) और राजनिवेश पोर्टल (Rajnivesh Portal) के उत्कृष्ट प्रदर्शन की खुले मंच से सराहना की। उन्होंने कहा कि नियमों के सरलीकरण (Ease of Doing Business) के कारण मरुधरा में औद्योगिक निवेश का वातावरण और सुदृढ़ हुआ है। इस महत्वपूर्ण बैठक में आयोजना, वित्त, गृह, उद्योग, ऊर्जा, सार्वजनिक निर्माण और स्वास्थ्य विभाग के आला नीति-निर्माता उपस्थित रहे।

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