नाथद्वारा में छूटीं शीतल फुहारें, मलमल और मोतियों के शृंगार से प्रभु को लड़ाया लाड़

Madhu Manjhi

पुष्टिमार्गीय वल्लभ संप्रदाय की सर्वाेच्च और प्रधानपीठ प्रभु श्रीनाथजी की हवेली में इन दिनों अधिकमास (पुरुषोत्तम मास) के पावन अवसर पर भक्ति, कला और सेवा का एक अद्भुत विधिक व अलौकिक संगम देखने को मिल रहा है। अधिकमास के विशेष मनोरथों की शृंखला के अंतर्गत ज्येष्ठ कृष्ण सप्तमी पर रविवार को हवेली में भव्य ऊष्णकालीन सेवा के विशेष मनोरथों का आयोजन किया गया। गोस्वामी तिलकायत राकेश जी महाराज की पावन आज्ञा एवं युवाचार्य गोस्वामी विशाल बावा के कुशल विधिक मार्गदर्शन में श्रीनाथजी प्रभु में ‘छूटत फुहारे आगे निके’ तथा नवनीत प्रियाजी में ‘रंग महल में बैठे पिय प्यारी’ मनोरथ की ऐसी मनोहारी झांकी सजाई गई कि दर्शन करने आए देश-विदेश के हजारों श्रद्धालु पूरी तरह से भाव-विभोर और भाव-मग्न हो गए।

राजभोग दर्शन: चंदन के बंगले में बिराजे ठाकुर जी, जीवंत हुई चीरहरण लीला

रविवार को आयोजित सेवा में सबसे मुख्य और आकर्षण का केंद्र राजभोग के अलौकिक दर्शन रहे। इस दौरान प्रभु श्रीनाथजी को भीषण ग्रीष्म ऋतु से शीतलता प्रदान करने के भाव से चंदन से निर्मित एक बेहद सुंदर और सुगंधित बंगले में विराजित किया गया। इसी दर्शन के साथ मणि कोठे में ठाकुर जी की प्रसिद्ध ‘चीरहरण लीला’ का अद्भुत और भावपूर्ण मनोरथ किया गया।

इस सजीव लीला चित्रण के लिए मणि कोठे परिसर को यमुनाजी के पावन स्वरूप में परिवर्तित करते हुए उसमें शीतल जल भरा गया। जल के भीतर और किनारे पर रजत (चांदी) एवं काष्ठ (लकड़ी) से निर्मित ब्रज की सखियों, गोपियों तथा कृत्रिम रूप से तैयार किए गए कदम के वृक्षों के माध्यम से द्वापर युग की चीरहरण लीला का बेहद सजीव और विहंगम दृश्य सृजित किया गया, जिसने पुष्टिमार्गीय सेवा के सर्वोच्च विधिक वैभव को प्रकट किया।

शरबती मलमल और मोतियों का अद्भुत शृंगार

ग्रीष्मकालीन (ऊष्णकालीन) विशेष सेवा प्रणाली के तहत इस दिन प्रभु श्रीनाथजी के बाल स्वरूप को अत्यंत शीतल और आरामदायक मोतियों के दिव्य आभूषणों से अलंकृत किया गया। प्रभु को विशेष रूप से ठंडी और झीनी ‘शरबती मलमल’ के वस्त्र धराए गए तथा विभिन्न प्रकार के सुवासित ऋतु पुष्पों की मालाओं एवं मनोहारी शृंगार से सुसज्जित किया गया। इसी समय श्री लाडले लाल प्रभु में राजभोग दर्शन के अंतर्गत पुष्पों से सुसज्जित एक अद्भुत और नयनाभिराम पालने का मनोरथ आयोजित हुआ, जिसमें प्रियाजी (राधाजी) को अत्यंत सुंदर पुष्प पालने में विराजित कर सखियों द्वारा लाड़ लड़ाया गया।

सायंकालीन फुहारों का मनोरथ; रंगोली और बतखों की कलाकृतियां

सायंकालीन (उत्थापन व भोग) दर्शनों के समय प्रभु श्रीनाथजी को पुनः चंदन के भव्य बंगले में विराजित किया गया, जहाँ प्रभु के सम्मुख शीतल जल की फुहारों (फव्वारों) का मनोरथ किया गया। इस मनोरथ के दौरान निज मंदिर और आसपास के चौकों को रंग-बिरंगे फूल-पत्तियों की आकर्षक सजावट, विशेष मांडनों (रंगोली) तथा हाथी, घोड़े, हंस और बतख की मनोहारी कलाकृतियों से सजाया गया था। इस पावन अवसर पर स्वयं तिलकायत राकेश महाराज, युवाचार्य विशाल बावा एवं लाल बावा साहब ने प्रभु की विधिक राजसी सेवा में साक्षात उपस्थित होकर ठाकुर जी को लाड़ लड़ाया और चंवर ढलाए।

दूसरी ओर, श्री नवनीत प्रियाजी मंदिर में आयोजित ‘रंग महल में बैठे पिय प्यारी’ मनोरथ के अंतर्गत मोती महल में विशेष रूप से निर्मित चांदी की हटड़ी में विराजित प्रभु के समक्ष भव्य ‘पुष्प सांझी’ सजाई गई। लाल और सफेद गुलाब व मोगरे के पुष्पों, रजत सखियों, कामधेनु गौमाताओं के विग्रहों एवं ठाकुर जी के प्रिय विविध खेल-खिलौनों से सजी इस अनूठी और अलौकिक झांकी ने समूचे परिसर को दिव्य सुवास से महका दिया। अधिकमास के इन विशेष दर्शनों का लाभ लेने के लिए समूचे मेवाड़, मारवाड़ और पड़ोसी राज्य गुजरात से आए वैष्णव भक्तों का तांता लगा रहा।

Live Sach – तेज़, भरोसेमंद हिंदी समाचार। राजनीति, राजस्थान से ब्रेकिंग न्यूज़, मनोरंजन, खेल और भारत की हर बड़ी खबर!

Share This Article