नागपुर/जोधपुर: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का नागपुर स्थित रेशिमबाग मैदान हमेशा से कड़े अनुशासन और राष्ट्र निर्माण के संकल्पों का गवाह रहा है। हाल ही में यहां देश भर से आए स्वयंसेवकों के लिए आयोजित ‘कार्यकर्ता विकास वर्ग (द्वितीय)’ का विधिवत समापन हुआ। यह संघ का एक उच्च स्तरीय प्रशिक्षण वर्ग है, जहां वैचारिक और शारीरिक निर्माण पर जोर दिया जाता है। इस बार के समापन समारोह की भव्यता तब और बढ़ गई, जब मंच के समीप विशिष्ट अतिथियों की कतार में मारवाड़ (जोधपुर) के 78 वर्षीय पूर्व महाराजा गजसिंह और उनकी पत्नी उपस्थित नजर आए। संघ के इतने महत्वपूर्ण कार्यक्रम में राजपरिवार की इस सादगीपूर्ण और सांस्कृतिक उपस्थिति ने सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा।

रेशिमबाग में ‘बापजी’ का पारंपरिक और गरिमामयी अंदाज
जोधपुर की जनता के बीच सम्मान से ‘बापजी’ (Bapji) कहलाने वाले पूर्व महाराजा गजसिंह और उनकी पत्नी पूरे कार्यक्रम के दौरान बेहद शालीन और अपनी पारंपरिक राजस्थानी वेशभूषा में नजर आए। संघ के इस मंच से राजघराने की यह उपस्थिति यह दर्शाती है कि मारवाड़ का राजपरिवार आज भी भारतीय संस्कृति, राष्ट्रवाद और अपनी जड़ों से कितनी गहराई से जुड़ा हुआ है। उनकी यह शिरकत सांस्कृतिक गौरव और संघ के वैचारिक दर्शन के बीच एक मजबूत सेतु की तरह देखी जा रही है।
कौन हैं जोधपुर के पूर्व महाराजा गजसिंह?
जोधपुर राजघराने के 38वें शासक रहे गजसिंह का जीवन बेहद प्रेरणादायक रहा है। मात्र 4 साल की अबोध उम्र में एक विमान दुर्घटना में पिता महाराजा हनवंत सिंह के निधन के बाद 1952 में उनका राज्याभिषेक किया गया था। इंग्लैंड के प्रतिष्ठित ईटन कॉलेज और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले गजसिंह ने रियासतों के खत्म होने के बाद भी हार नहीं मानी। उन्होंने ऐतिहासिक उम्मेद भवन पैलेस (Umaid Bhawan Palace) और मेहरानगढ़ फोर्ट (Mehrangarh Fort) का संरक्षण कर राजस्थान के हेरिटेज टूरिज्म को दुनिया भर में एक नई पहचान दिलाई। इसके अलावा, वे राज्यसभा सांसद और त्रिनिदाद व टोबैगो में भारत के उच्चायुक्त (High Commissioner) जैसी महत्वपूर्ण कूटनीतिक जिम्मेदारियां भी निभा चुके हैं।
कौन हैं उनकी धर्मपत्नी हेमलता राजे?
पूर्व महाराजा गजसिंह के हर कदम पर उनका साथ देने वालीं उनकी धर्मपत्नी हेमलता राजे (Hemlata Rajye) भी अपने आप में एक खास पहचान रखती हैं। उनका संबंध मूल रूप से कश्मीर के पुंछ राजघराने से है। 1973 में गजसिंह जी के साथ विवाह बंधन में बंधने के बाद से ही वे जोधपुर के सामाजिक और शैक्षणिक विकास में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। महारानी हेमलता राजे विशेष रूप से महिला शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और स्थानीय हस्तकला (Handicrafts) को बढ़ावा देने के लिए जानी जाती हैं। वे जोधपुर के प्रतिष्ठित राजमाता कृष्ण कुमारी गर्ल्स पब्लिक स्कूल (RKKGPS) सहित कई सामाजिक संस्थाओं के संचालन और मारवाड़ की सांस्कृतिक विरासत को सहेजने के काम में अपना सक्रिय योगदान दे रही हैं।