जयपुर। राजस्थान की ग्रामीण आबादी को उनके घर-आँगन तक सुलभ बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में सहकारिता विभाग ने एक बेहद क्रांतिकारी और महत्वपूर्ण पहल की है। ‘सहकार से समृद्धि’ अभियान के अंतर्गत अब राज्य में ग्राम सेवा सहकारी समितियों (पैक्स) एवं प्राथमिक डेयरी सहकारी समितियों के माध्यम से फिनटेक (Fintech) आधारित डोर-स्टेप बैंकिंग सेवाओं का व्यापक विस्तार किया जा रहा है। इससे अब ग्रामीणों को पैसे निकालने या जमा कराने के लिए दूरदराज स्थित बैंक शाखाओं के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।
सहकारिता विभाग के शासन सचिव एवं रजिस्ट्रार (सहकारी समितियां) डॉ. समित शर्मा ने बुधवार को शासन सचिवालय में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में राजस्थान राज्य सहकारी बैंक (अपैक्स बैंक) के अधिकारियों की ‘टू-डू लिस्ट’ की गहन समीक्षा की। समीक्षा के दौरान उन्होंने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए सभी सक्रिय प्राथमिक डेयरी समितियों को अनिवार्य रूप से ‘बैंक मित्र’ बनाकर उन्हें माइक्रो एटीएम (Micro ATM) उपलब्ध कराने के कड़े निर्देश जारी किए।
मिशन 2026 और 2027: तय की गई सख्त समय-सीमा
शासन सचिव डॉ. समित शर्मा ने तकनीक आधारित इस बैंकिंग व्यवस्था को धरातल पर उतारने के लिए दो चरणों में समय-सीमा (Timeline) निर्धारित की है:
- 30 सितंबर 2026 तक: राज्य की 5 हजार सहकारी समितियों को अनिवार्य रूप से बैंक मित्र बनाकर माइक्रो एटीएम से लैस किया जाएगा।
- 31 मार्च 2027 तक: प्रदेश में सक्रिय सभी 12 हजार प्राथमिक दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियों को पूर्ण रूप से बैंक मित्र के रूप में परिवर्तित कर माइक्रो एटीएम थमाए जाएंगे।
उन्होंने बताया कि इस महत्वाकांक्षी योजना को नाबार्ड (NABARD) की वित्तीय सहायता से गति दी जा रही है। इन आधुनिक माइक्रो एटीएम के जरिए ग्रामीण अपने खातों का बैलेंस जान सकेंगे, नकद वित्तीय लेन-देन कर सकेंगे, ऋण (लोन) राशि प्राप्त कर सकेंगे और साथ ही अपनी ऋण राशि को वापस जमा भी करा सकेंगे। वर्तमान तक राज्य में लगभग 2,700 पैक्स तथा बैंक मित्र के रूप में सक्रिय 557 प्राथमिक डेयरी समितियों को यह माइक्रो एटीएम मशीनें वितरित की जा चुकी हैं।
घर बैठे खुलेगा बैंक खाता, समितियों को होगी अतिरिक्त आय
डॉ. शर्मा ने बताया कि सहकारी बैंकों द्वारा अपने विशेष ‘एफआईजी पोर्टल’ (FIG Portal) पर एक नई और सुदृढ़ तकनीकी व्यवस्था विकसित की जा रही है। इस डिजिटल सिस्टम के माध्यम से पैक्स एवं डेयरी समितियों के व्यवस्थापक स्वयं ग्रामीणों के निवास स्थान अथवा उनके कार्यस्थल (जैसे खेत या गोशाला) पर पहुंचेंगे। वहां वे मौके पर ही ग्रामीणों के नए बैंक खाते खोल सकेंगे और उनकी जमा पूंजी का संग्रहण कर सकेंगे।
इस व्यवस्था के दोहरा लाभ सामने आएंगे। पहला, ग्रामीणों को अपने घर के निकट ही सुरक्षित बैंकिंग सुविधाएं प्राप्त होंगी। दूसरा, सहकारी बैंकों की अमानतों (Deposits) में भारी वृद्धि होगी, जिससे गांवों में किसानों को लोन देने की उनकी वित्तीय ऋण वितरण क्षमता बढ़ेगी। इसके साथ ही, ग्रामीणों से जमा संग्रहण (Deposit Collection) करने के बदले में पैक्स एवं डेयरी समितियों को बैंक की ओर से कमीशन के रूप में एक तय अतिरिक्त आय भी प्राप्त होगी, जिससे ये समितियां आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनेंगी।
हर ग्राम पंचायत में एक पैक्स स्थापित करने का लक्ष्य
इस महा-अभियान की पृष्ठभूमि की जानकारी देते हुए शासन सचिव ने बताया कि राज्य सहकारी बैंक द्वारा गत 7 मई को आयोजित एक राज्य स्तरीय कार्यशाला से इस मुहिम का शंखनाद किया गया था। इसके बाद अब प्रदेश के प्रत्येक जिले में केन्द्रीय सहकारी बैंकों (CCBs) द्वारा स्थानीय कार्यशालाओं का आयोजन कर इस अभियान को युद्धस्तर पर गति दी जा रही है।
वर्तमान में राजस्थान के भीतर कुल 11 हजार 70 ग्राम पंचायतें हैं, जिनमें से 9 हजार 500 से अधिक ग्राम पंचायतों में पैक्स का सफल गठन किया जा चुका है। राज्य सरकार का अंतिम लक्ष्य प्रदेश की प्रत्येक ग्राम पंचायत में कम से कम एक पैक्स आवश्यक रूप से स्थापित करना है। यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों में वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) को एक नई और ऐतिहासिक गति देगी तथा सहकारी संस्थाओं को बहुउद्देशीय सेवा केन्द्रों के रूप में विकसित करने में मील का पत्थर साबित होगी।