रियल एस्टेट सेक्टर को भजनलाल सरकार की बड़ी राहत: बाजार भाव के अनुरूप तर्कसंगत होंगी डीएलसी दरें

Madhu Manjhi

जयपुर । राजस्थान में जमीन-जायदाद की खरीद-फरोख्त और रजिस्ट्री से जुड़ी पूरी व्यवस्था अब तेजी से हाईटेक और डिजिटल स्वरूप लेने जा रही है. मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की सुशासन की सोच के अनुरूप प्रदेश में संपत्ति पंजीकरण व्यवस्था को पूरी तरह टेक्नोलॉजी ड्रिवन बनाया जा रहा है. आने वाले समय में संपत्ति पंजीकरण के अधिकांश कार्य पूरी तरह ऑनलाइन होंगे, दस्तावेज सीधे आपके डिजिलॉकर में मिलेंगे और जियो-टैगिंग के जरिए संपत्तियों का मौके पर भौतिक सत्यापन किया जाएगा. पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग ने इस बड़े ‘डिजिटल रोडमैप’ की विस्तृत झलक जयपुर के कोएरा भवन में आयोजित स्टेकहोल्डर्स संवाद कार्यक्रम में दिखाई है. इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में क्रेडाई सहित बिल्डर्स, डेवलपर्स, वरिष्ठ अधिवक्ताओं और बैंक प्रतिनिधियों ने भाग लिया और अपने जरूरी सुझाव साझा किए.

‘एनीवेयर रजिस्ट्रेशन’ का विस्तार और एआई आधारित सेवाएं

संवाद कार्यक्रम में प्रमुख सचिव (वित्त) वैभव गालरिया और वित्त सचिव श्री कुमार पाल गौतम ने विभाग के आगामी तकनीकी सुधारों के स्पष्ट संकेत दिए. विभाग अब ‘एनीवेयर रजिस्ट्रेशन’ सुविधा का दायरा और अधिक बढ़ाने पर विचार कर रहा है. इसके तहत अब मॉर्गेज (गिरवी) से जुड़े दस्तावेजों की रजिस्ट्री भी राज्य के किसी भी सब-रजिस्ट्रार दफ्तर से कराई जा सकेगी, जिससे संबंधित पक्षों को निर्धारित कार्यालयों के बार-बार चक्कर काटने से स्थाई मुक्ति मिलेगी.

वित्त सचिव कुमार पाल गौतम ने बताया कि पिछले वर्ष प्रदेश में रिकॉर्ड 19 लाख दस्तावेजों का पंजीकरण हुआ है. इस भारी संख्या को देखते हुए विभाग अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित समाधानों और ऑनलाइन साइट रजिस्ट्रेशन प्रणालियों पर तेजी से काम कर रहा है, ताकि निवेशकों और आम नागरिकों को छोटे-मोटे कामों के लिए सरकारी दफ्तर न आना पड़े.

पैन, आधार और जन आधार का ऑनलाइन एकीकरण; फर्जीवाड़े पर लगेगी लगाम

पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग के महानिरीक्षक (IG) स्टांप शरद मेहरा ने तकनीकी ढांचे में होने वाले बड़े बदलावों की विस्तार से जानकारी दी. रजिस्ट्री में होने वाली किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी को रोकने, सुरक्षा और पारदर्शिता को पुख्ता करने के लिए विभाग अब पैन, आधार, जन आधार और रिप्स (RIPS) पोर्टल का ऑनलाइन एकीकरण कर रहा है. भू-माफियाओं और ठगी पर लगाम लगाने के लिए बैंकों और आम जनता को पैन वेरिफिकेशन का नि:शुल्क एक्सेस जल्द ही उपलब्ध कराया जाएगा.

इसके अतिरिक्त, रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी होते ही आपकी जमीन के डिजिटल मूल दस्तावेज पूर्णतः सुरक्षित तरीके से आपके ‘डिजिलॉकर’ में ट्रांसफर कर दिए जाएंगे. विभाग के महत्वाकांक्षी ‘ई-पंजीयन-3’ प्रोजेक्ट के तहत अब संपत्तियों की जियो-टैगिंग की जा रही है. वर्तमान में प्रदेश के 39 सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों में इसे सफलतापूर्वक लागू किया जा चुका है, जिसका विस्तार जल्द ही राज्य के सभी कार्यालयों में कर दिया जाएगा.

बाजार दरों के अनुरूप होंगी DLC दरें, मिलेगा रेशनलाइजेशन का लाभ

इस उच्च स्तरीय कार्यक्रम में रियल एस्टेट सेक्टर से जुड़े हितधारकों और बिल्डर्स ने डीएलसी (DLC) दरों की विसंगतियों का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया. प्रमुख सचिव वित्त वैभव गालरिया ने सभी को आश्वस्त किया कि विभाग वास्तविक बाजार दरों और सरकारी डीएलसी दरों के बीच के बड़े अंतर को कम करने के लिए ‘डीएलसी रेशनलाइजेशन’ (तर्कसंगतीकरण) पर बहुत गंभीरता से काम कर रहा है. इससे संपत्तियों के सही और वास्तविक मूल्यांकन तथा स्टांप ड्यूटी के निर्धारण में पूरी पारदर्शिता आएगी. इसके अतिरिक्त, भविष्य में ‘ई-पट्टा’ जैसी आधुनिक डिजिटल नागरिक सेवाएं भी शुरू की जा सकती हैं.

संवाद के दौरान बिल्डर्स और वकीलों ने वर्ष 2004 से पहले के प्रोजेक्ट्स के नियमन में प्रशासनिक ढील देने और छोटे कस्बों व शहरों में ऑटो म्यूटेशन (नामांतरण) की लंबित प्रक्रियाओं जैसी व्यावहारिक दिक्कतें भी अधिकारियों के समक्ष रखीं, जिस पर वित्त विभाग के शीर्ष अधिकारियों ने गंभीरता से अध्ययन कर जल्द ही सकारात्मक और सुधारात्मक कदम उठाने का पूरा भरोसा दिया है.

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