कोटा। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की एक बड़ी और लंबी जांच के बाद नगर पालिका अंता के अधिशाषी अधिकारी (EO) और एईएन (AEN) महेंद्र सिंह के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज कर लिया गया है। करीब डेढ़ महीने पहले 11 अप्रैल को महेंद्र सिंह के पास से बरामद हुए 3 लाख 70 हजार रुपए की नकदी पूरी तरह अवैध वसूली की निकली। जांच में साफ हुआ है कि आरोपी अधिकारी नगर पालिका क्षेत्र में हुए निर्माण कार्यों की एवज में ठेकेदारों से यह मोटी रकम वसूल कर हिण्डौन सिटी स्थित अपने घर ले जा रहा था। संतोषजनक जवाब न मिलने और सबूतों के आधार पर एसीबी ने दो दिन पहले आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर शिकंजा कस दिया है।
उधारी की झूठी कहानी; गवाहों ने फोन पर ही पहचानने से किया इनकार
11 अप्रैल को जब एसीबी ने नोटों से भरा बैग बरामद किया था, तब महेंद्र सिंह ने खुद को पाक-साफ बताने के लिए उधारी की कहानी रची थी। उसने दावा किया था कि यह रकम उसने धौलपुर के बाड़ी निवासी गोविंद सिंह चौहान और दौलत नाम के व्यक्ति से उधार ली है।
तभी एसीबी के अधिकारियों ने मौके पर ही तफ्तीश करते हुए गोविंद सिंह के मोबाइल पर कॉल घुमा दी। एसीबी ने जब गोविंद से महेंद्र को उधार पैसे देने के बारे में पूछा, तो उसने ईओ महेंद्र सिंह को पहचानने से ही साफ इनकार कर दिया। इसके बाद जब दूसरे गवाह दौलत से बात की गई, तो उसने भी पैसे उधार देने की बात को सिरे से खारिज कर दिया। दोनों झूठ पकड़े जाने पर आरोपी ईओ ने पैंतरा बदला और साले की शादी के लिए रुपए लाने का बहाना बनाया। जवाब में पूरी तरह विरोधाभास होने पर एसीबी ने रकम को तत्काल जब्त कर लिया था।
सरकारी बोर्ड लगी कार छोड़ी, ई-रिक्शा से भागने की फिराक में थे ईओ
आरोपी ईओ को दबोचने की कहानी किसी फिल्मी थ्रिलर से कम नहीं है। एसीबी को सटीक इनपुट मिला था कि महेंद्र सिंह करीब 4 लाख रुपए की अवैध वसूली समेटकर अंता से कोटा होते हुए हिण्डौन जा रहे हैं। एसीबी के पास एक संदिग्ध कार का नंबर था, जिस पर ‘राजस्थान सरकार’ लिखा हुआ था। कोटा में एसीबी टीम एक्टिव हुई तो पता चला कि आरोपी कार या ट्रेन बदल सकता है। इसके बाद करौली एसीबी को अलर्ट पर रखा गया।
जब महेंद्र सिंह की लोकेशन गंगापुर सिटी आई, तो एसीबी ने खेड़ा तिराहे पर नाकाबंदी कर निगरानी शुरू की, लेकिन शातिर ईओ हिण्डौन स्टेशन पहुंच गया। इसके बाद एसीबी की टीम बयाना मोड़ (हिण्डौन) पहुंची और वॉट्सऐप पर ईओ की फोटो निकालकर हर संदिग्ध कार की चेकिंग करने लगी। इसी दौरान एसीबी को चकमा देने के लिए महेंद्र सिंह सरकारी बोर्ड लगी कार को छोड़, एक ई-रिक्शा में बैठकर बेहद सामान्य तरीके से एसीबी टीम के ठीक सामने से निकल गए। हालांकि, सतर्क अधिकारियों को भनक लगते ही उन्होंने पीछा कर ई-रिक्शा को रुकवाया और आरोपी को दबोच लिया।
अब खुलेगा राज: किन-किन ठेकेदारों से की थी वसूली?
आरोपी ईओ को नोटों से भरे बैग के साथ रंगे हाथों पकड़ने वाले एसीबी इंस्पेक्टर जगदीश भारद्वाज ने बताया कि शुरुआती जांच में आरोपी के सारे दावे झूठे पाए गए हैं। जिन लोगों से पैसे उधार लेने की बात कही गई थी, उन्होंने ईओ को पहचानने तक से मना कर दिया। यह स्पष्ट होने के बाद कि यह राशि ठेकेदारों से की गई अवैध वसूली की है, मामला दर्ज कर लिया गया है। अब एसीबी इस बात की गहनता से जांच कर रही है कि यह पैसा किन-किन ठेकेदारों से और किस कार्य के बदले वसूला गया था, जिससे इस भ्रष्टाचार के सिंडिकेट में शामिल अन्य चेहरों को भी बेनकाब किया जा सके।