राजस्थान हाईकोर्ट का अहम फैसला: निजी प्रैक्टिस करने वाले डॉक्टर नहीं मांग सकते NPA लेने वाले जूनियर डॉक्टरों के बराबर वेतन

Madhu Manjhi

जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने नॉन-प्रैक्टिसिंग अलाउंस (NPA – Non-Practicing Allowance) और वेतन निर्धारण (Pay Fixation) से जुड़े लंबे समय से चले आ रहे एक बड़े विवाद में राज्य सरकार को बड़ी राहत दी है।

अदालत ने अपने महत्वपूर्ण और ‘रिपोर्टेबल जजमेंट’ में स्पष्ट कर दिया है कि जो सरकारी डॉक्टर स्वेच्छा से NPA का विकल्प नहीं चुनते और अपनी निजी प्रैक्टिस जारी रखते हैं, वे उन डॉक्टरों (चाहे वे जूनियर ही क्यों न हों) के बराबर वेतन की मांग नहीं कर सकते जिन्होंने NPA लेकर अपनी निजी प्रैक्टिस हमेशा के लिए छोड़ दी है।

जस्टिस आनंद शर्मा की एकलपीठ ने इस मामले में 30 से अधिक याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करते हुए राजस्थान सिविल सेवा अपीलीय अधिकरण (ट्रिब्यूनल) के उन आदेशों को रद्द कर दिया, जिनमें वेतन समानता की बात कही गई थी। इसके साथ ही, वेतन समानता (Stepping-Up) और संशोधित वेतनमान के लाभ की मांग करने वाले डॉक्टरों की याचिकाएं भी कोर्ट ने खारिज कर दीं।

क्या था पूरा विवाद?

यह पूरा विवाद सातवें वेतन आयोग (7th Pay Commission) की सिफारिशों के बाद लागू हुए ‘राजस्थान सिविल सेवा (संशोधित वेतनमान) नियम, 2017’ से जुड़ा है। इन नियमों के तहत NPA लेने वाले डॉक्टरों के वेतन निर्धारण के लिए एक विशेष फॉर्मूला लागू किया गया था। इस फॉर्मूले के कारण कई ऐसे ‘जूनियर डॉक्टरों’ का वेतन अपने ‘वरिष्ठ (सीनियर) डॉक्टरों’ से अधिक हो गया, क्योंकि जूनियरों ने NPA का विकल्प चुना था, जबकि सीनियरों ने नहीं।

इस स्थिति को ‘वेतन विसंगति’ (Salary Anomaly) बताते हुए वरिष्ठ डॉक्टरों ने ट्रिब्यूनल में याचिका दायर कर दावा किया था कि एक जूनियर का वेतन उनसे अधिक नहीं हो सकता। उन्होंने अपना वेतन जूनियरों के बराबर करने और एरियर सहित अन्य लाभ देने की मांग की थी।

राज्य सरकार की अदालत में दलीलें

राज्य सरकार की ओर से सरकारी अधिवक्ता आर्चित बोहरा ने पक्ष रखते हुए कहा:

  • अलग वेतन व्यवस्था: नियम 11(B)(1) में स्पष्ट प्रावधान है कि जिन डॉक्टरों को 1 जनवरी 2016 को NPA मिल रहा था, उनके संशोधित वेतन निर्धारण में NPA पर देय महंगाई भत्ते (DA on NPA) को भी जोड़ा जाएगा।
  • NPA पूरी तरह वैकल्पिक है: सरकार ने कहा कि NPA लेना डॉक्टरों के लिए ‘ऑप्शनल’ है। जो इसे लेते हैं, उन्हें शपथ-पत्र देना पड़ता है कि वे निजी प्रैक्टिस नहीं करेंगे।
  • अतिरिक्त आय: जो डॉक्टर NPA नहीं लेते, वे निजी चिकित्सा प्रैक्टिस कर सकते हैं और उससे आर्थिक लाभ कमा सकते हैं।
  • सरकार का तर्क था कि NPA लेने वाले और न लेने वाले डॉक्टरों को एक ही श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। ऐसे में ट्रिब्यूनल द्वारा दिया गया ‘वेतन वृद्धि’ (Stepping Up) का आदेश नियमों के खिलाफ था।

प्रतिवादी (वरिष्ठ) डॉक्टरों का पक्ष

डॉक्टरों के अधिवक्ताओं ने तर्क दिया कि NPA केवल एक ‘भत्ता’ (Allowance) है, इसे मूल वेतन का हिस्सा मानकर वेतन निर्धारण का आधार नहीं बनाया जा सकता। उनका कहना था कि नियम 11(7) के तहत यदि संशोधित वेतन के बाद कोई जूनियर कर्मचारी सीनियर से ज्यादा वेतन पाने लगे, तो सीनियर का वेतन भी बढ़ाकर उसके बराबर (Stepping Up) किया जाना चाहिए। उनका दावा था कि सरकार की इस पद्धति से वरिष्ठ अधिकारियों को आर्थिक नुकसान हुआ है।

हाईकोर्ट का स्पष्ट और सख्त फैसला

दोनों पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने अपने विस्तृत फैसले में कई अहम टिप्पणियां कीं:

  1. स्वतः मिलने वाला लाभ नहीं: NPA कोई ऐसा लाभ नहीं है जो अपने आप मिल जाए। इसके लिए निजी प्रैक्टिस छोड़ने का शपथ-पत्र देना होता है।
  2. समान स्थिति नहीं: NPA लेने वाला डॉक्टर निजी प्रैक्टिस का अधिकार छोड़ता है, जबकि न लेने वाला डॉक्टर बाहर से कमाई कर सकता है। इसलिए ये दोनों अलग-अलग श्रेणियां हैं और इनकी तुलना नहीं की जा सकती।
  3. ट्रिब्यूनल की टिप्पणी गलत: हाईकोर्ट ने ट्रिब्यूनल की उस टिप्पणी को भी गलत माना जिसमें कहा गया था कि NPA केवल एक भत्ता है। कोर्ट ने कहा कि सरकार को वेतन निर्धारण व्यवस्था बनाने का पूरा अधिकार है।
  4. सहानुभूति के आधार पर आदेश नहीं: कोर्ट ने कहा कि ट्रिब्यूनल ने वैधानिक नियमों की अनदेखी कर सहानुभूति के आधार पर आदेश दिए, जो कानून की नजर में सही नहीं है।

सरकार को मिली बड़ी जीत

फैसले के अंत में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की सभी याचिकाएं स्वीकार करते हुए ट्रिब्यूनल के आदेशों को निरस्त कर दिया। वहीं, डॉक्टरों की वे सभी याचिकाएं खारिज कर दीं जिनमें जूनियरों के बराबर वेतन और NPA से जुड़े लाभों की मांग की गई थी।

इस फैसले को राजस्थान के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग में वेतन और भत्तों से जुड़े मामलों के लिए एक ‘महत्वपूर्ण नजीर’ (Landmark Precedent) माना जा रहा है, जिसका असर भविष्य में ऐसे सभी दावों पर पड़ेगा।

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