बदल रही नारी निकेतनों की सूरत: पिछले ढाई साल में पुनर्वास पर खर्च हुए 1613 लाख रुपये

Madhu Manjhi

जयपुर। सपनों के टूटने, अपनों के छूटने और सामाजिक प्रताड़ना के अंधकार से निकलकर जब कोई महिला राजस्थान सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के ‘नारी निकेतन’ (राज्य महिला सदन) की दहलीज पर कदम रखती है, तो उसे सिर्फ एक छत नहीं मिलती, बल्कि मिलता है आत्मसम्मान, आत्मनिर्भरता और जीने की नई किरण।

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के संवेदनशील नेतृत्व और दूरदर्शी सोच के चलते आज प्रदेश के ये केंद्र महज़ शेल्टर होम नहीं, बल्कि निराश्रित और आश्रयहीन युवतियों की तकदीर बदलने वाली कर्मस्थली बन चुके हैं। वर्तमान में विभाग द्वारा जयपुर संभाग के जिला मुख्यालय पर 150 की क्षमता का एक राज्य महिला सदन और शेष अन्य संभागों के जिला मुख्यालयों पर 50-50 की क्षमता के साथ एक-एक नारी निकेतन संचालित हैं, जहाँ उनके जीवन को एक नई और सम्मानजनक दिशा दी जा रही है।

सुरक्षित वातावरण के साथ मिल रही आधुनिक ट्रेनिंग

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री अविनाश गहलोत ने बताया कि इन संस्थानों का मुख्य उद्देश्य सामाजिक रूप से उत्पीड़ित, अनैतिक परिस्थितियों की शिकार एवं निराश्रित महिलाओं को सुरक्षा प्रदान करना और उनमें नवजीवन का संचार करना है।

  • निःशुल्क सुविधाएं: यहाँ आवासित महिलाओं को पूरी तरह सुरक्षित वातावरण में निःशुल्क आवास, पौष्टिक भोजन, वस्त्र एवं समुचित चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।
  • अकेलेपन से मुक्ति: यहाँ सभी त्योहारों और सांस्कृतिक उत्सवों का सामूहिक रूप से आयोजन होता है, जिससे महिलाओं को कभी भी अकेलेपन या परिवार से दूर होने का अहसास न हो।
  • कौशल विकास: आत्मनिर्भर बनाने के लिए इन्हें एडवांस्ड सिलाई-कढ़ाई और ब्यूटीशियन कोर्स जैसी आधुनिक व रोजगारपरक ट्रेनिंग भी उपलब्ध कराई जा रही है।

जब 11 बेटियों के विवाह के लिए आए 1900 से अधिक रिश्ते

इस सकारात्मक बदलाव और लगातार बढ़ते पुनर्वास का सबसे जीवंत उदाहरण हाल ही में राज्य महिला सदन, जयपुर में देखने को मिला। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के मार्गदर्शन में जब संस्थान की 11 योग्य युवतियों के विवाह के लिए सार्वजनिक विज्ञप्ति जारी की गई, तो समाज की सोच में एक बड़ा और प्रगतिशील बदलाव नजर आया।

इन 11 बेटियों से विवाह करने के लिए प्रदेशभर से 1900 से अधिक उच्च शिक्षित और सुयोग्य युवकों ने आवेदन किया। विभाग ने केवल युवकों की आर्थिक स्थिति ही नहीं, बल्कि पुलिस वेरिफिकेशन और पारिवारिक पृष्ठभूमि की पूरी गहनता से जांच करने के बाद ही वरों का चयन किया। इन शादियों का आयोजन किसी रसूखदार परिवार की तरह बेहद धूमधाम से किया जाता है, जहाँ स्वयं मुख्यमंत्री और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी ‘कन्यादान’ करने और वधू को आशीर्वाद देने पहुंचते हैं।

महिलाओं के कल्याण और पुनर्वास पर बढ़ते आंकड़े

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री गहलोत ने सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित करते हुए पिछले ढाई वर्षों के वित्तीय एवं व्यावहारिक आंकड़े साझा किए, जो राज्य सरकार की गंभीरता को दर्शाते हैं:

विवरण / गतिविधिपिछले ढाई वर्षों के प्रगति आंकड़े
कुल आवासित महिलाएं1,006 महिलाएं
पुनर्वास और कल्याण पर कुल व्यय₹1,613.35 लाख
विवाह के माध्यम से पुनर्वासित महिलाएं30 से अधिक महिलाएं
कौशल विकास प्रशिक्षण (Skill Training)218 महिलाएं

“अतीत के कड़वे अनुभवों को पीछे छोड़कर भविष्य को संवारने का जो काम राजस्थान के नारी निकेतन कर रहे हैं, वह समाज के लिए एक बेहतरीन नजीर है। मुख्यमंत्री की संवेदनशीलता इस बात का जीवंत प्रमाण है कि यदि सही संरक्षण, सुरक्षा और अवसर मिले, तो समाज की सबसे वंचित महिला भी गरिमा के साथ सिर उठाकर जी सकती है। नारी निकेतन अब बेसहारा महिलाओं के लिए ‘सशक्तिकरण का नया और स्थाई पता’ बन चुके हैं।”

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