बाड़मेर। राजस्थान के सरहदी जिले बाड़मेर से मंगलवार को एक बेहद सनसनीखेज और झकझोर देने वाली खबर सामने आई है। गिरल लिग्नाइट माइंस (Giral Lignite Mines) के बाहर स्थानीय लोगों को रोजगार और मूलभूत सुविधाओं की मांग को लेकर पिछले 39 दिनों से जारी मजदूरों का धरना आज उग्र आंदोलन में तब्दील हो गया। सैकड़ों गाड़ियों के विशाल काफिले के साथ बाड़मेर जिला कलक्ट्रेट का घेराव करने पहुंचे शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने प्रशासनिक अनदेखी से क्षुब्ध होकर कलक्ट्रेट परिसर में अचानक अपने ऊपर पेट्रोल छिड़क कर आत्मदाह (Self-Immolation) करने की कोशिश की।
विधायक भाटी द्वारा अचानक उठाए गए इस खौफनाक कदम से पूरे कलक्ट्रेट परिसर और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। मौके पर मुस्तैद अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) नितेश आर्य और अन्य आला अधिकारियों ने मुस्तैदी दिखाते हुए तुरंत भाटी को पकड़ा और माचिस जलाने से पहले ही उन्हें सुरक्षित घेरे में ले लिया, जिससे एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया।
सैकड़ों गाड़ियों का काफिला और पैदल मार्च: पुलिस ने शहर के बाहर रोका
इससे पहले, मंगलवार सुबह गिरल गांव में एक विशाल ‘मजदूर आंदोलन जनसभा’ का आयोजन किया गया था। इस महापंचायत में न केवल बाड़मेर बल्कि प्रदेशभर से विभिन्न श्रमिक संगठन, किसान, युवा, सामाजिक कार्यकर्ता और ग्रामीण एकजुट हुए थे। जनसभा के बाद शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी के नेतृत्व में हजारों की संख्या में आक्रोशित लोग सैकड़ों ट्रैक्टरों, जीपों और गाड़ियों के काफिले के साथ जिला मुख्यालय के लिए रवाना हुए।
आंदोलन की संवेदनशीलता और भारी भीड़ को देखते हुए बाड़मेर पुलिस ने शहर की सीमा पर स्थित बीएसएफ (BSF) गेट के पास ही सभी वाहनों को बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया। प्रशासन द्वारा आगे बढ़ने से रोके जाने पर विधायक भाटी और हजारों मजदूर गाड़ियों से उतर गए और पैदल ही नारेबाजी करते हुए तख्तियां और बैनर हाथ में लेकर कलक्ट्रेट की तरफ मार्च करने लगे। भाटी ने आरोप लगाया कि प्रशासन शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने आ रहे ग्रामीणों की आवाज को पुलिस की लाठियों के दम पर दबाना चाहता है।
क्या हैं गिरल लिग्नाइट माइंस के आंदोलनकारियों की प्रमुख चिंताएं और 6 सूत्री मांगें?
दरअसल, राजस्थान स्टेट माइंस एंड मिनरल्स लिमिटेड (RSMML) और अनुबंधित कंपनियों द्वारा थुंबली व गिरल क्षेत्र में भारी मात्रा में जमीन का अधिग्रहण किया गया था।
| आंदोलन का मुख्य बिंदु | मजदूरों और ग्रामीणों की प्रमुख मांगें |
| 1. रोजगार का अधिकार | जमीन अधिग्रहण के समय कंपनियों ने स्थानीय युवाओं को स्थाई नौकरी का वादा किया था, जिसे पूरा किया जाए। |
| 2. छंटनी पर तुरंत रोक | पिछले कुछ समय से स्थानीय अनुभवी युवाओं को बिना कारण माइनिंग काम से हटाया जा रहा है, उन्हें वापस बहाल किया जाए। |
| 3. बुनियादी सुविधाएं | माइनिंग प्रभावित गांवों में गंभीर जल संकट है, वहां टैंकरों के बजाय स्थाई पेयजल और चिकित्सा (एम्बुलेंस) की व्यवस्था हो। |
| 4. श्रम नियमों की पालना | खदानों में काम करने वाले श्रमिकों के लिए 8 घंटे की शिफ्ट निर्धारित हो और सुरक्षा मानकों (तारबंदी) का कड़ाई से पालन हो। |
“मजदूर व्यवस्था की रीढ़, 14 दिन से धरने पर बैठा हूँ फिर भी सो रहा है प्रशासन”
खुद पर पेट्रोल छिड़कने की इस घटना के बाद कलक्ट्रेट के सभी मुख्य द्वारों को पुलिस ने एहतियातन बंद कर दिया है, जबकि बाहर हजारों की संख्या में ग्रामीण धरना देकर बैठ गए हैं।
सुरक्षित घेरे में लिए जाने के बाद विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने बेहद तल्ख लहजे में कहा कि:
“मजदूर और किसान किसी भी प्रदेश या लोकतांत्रिक व्यवस्था की असली रीढ़ होते हैं। उनकी जायज मांगों को सरकार को अत्यंत संवेदनशीलता के साथ सुनना चाहिए था। पिछले 39 दिनों से ये गरीब लोग कड़कड़ाती धूप और 44 डिग्री से अधिक के तापमान में खुले आसमान के नीचे शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे हैं। मैं स्वयं पिछले 14 दिनों से इन बेसहारा मजदूरों के साथ ज़मीन पर सो रहा हूँ और भीषण गर्मी के कारण मेरी तबीयत भी बिगड़ी, लेकिन गूंगे-बहरे प्रशासन के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी। जब जनप्रतिनिधियों और हजारों ग्रामीणों की आवाज को इस तरह ठुकराया जाएगा, तो हमारे पास अपने प्राणों की आहुति देने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचता।”
फिलहाल जिला मुख्यालय पर तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है। पुलिस और प्रशासन के आला अधिकारी कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त जाब्ता तैनात कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ मजदूर और जन प्रतिनिधि आर-पार की लड़ाई का एलान करते हुए कलक्ट्रेट के सामने डटे हुए हैं।