जैसलमेर। राजस्थान के राजस्व महकमे में भ्रष्टाचार और भू-माफियाओं के गठजोड़ का एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है जिसने पूरे प्रशासनिक तंत्र को हिलाकर रख दिया है। जैसलमेर जिले की नोख उप-तहसील के बोझाना गांव में भू-माफियाओं ने राजस्व अधिकारियों के साथ मिलकर न्यायालय का एक पूरी तरह से फर्जी और जाली आदेश (Fake Court Order) तैयार किया। इस जाली आदेश के सहारे करीब 3,000 बीघा बेशकीमती सरकारी जमीन को एक निजी सोलर पावर कंपनी को 30 करोड़ रुपये में बेच दिया गया।
इस महा-घोटाले का भंडाफोड़ होने के बाद राजस्व मंडल (अजमेर) और उपनिवेशन आयुक्त ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तीन बड़े राजस्व अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड (निलंबित) कर दिया है, जबकि पुलिस ने इस संबंध में 15 लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज कर ली है।
कैसे रचा गया 30 करोड़ रुपये का यह ‘महा-फर्जीवाड़ा’?
- पहला धमाका (8 मई): खुलासा हुआ कि न्यायालय का कूट रचित (फर्जी) आदेश तैयार कर 3 हजार बीघा सरकारी जमीन एक निजी सोलर कंपनी को 30 करोड़ में बेची गई, जिसकी वास्तविक बाजार कीमत करीब 300 करोड़ रुपये आंकी जा रही है।
- रजिस्ट्री की धज्जियां (9 मई): उजागर हुआ कि उप-पंजीयक (रजिस्ट्रार) ने बिना किसी प्रामाणिक लिंक डॉक्यूमेंट (Link Documents) की जांच किए धड़ल्ले से इस भूखंड की रजिस्ट्री माफियाओं के नाम कर दी।
- दफ्तर छोड़ घर से हुआ खेल (14-15 मई): जांच में सामने आया कि सरकारी रिकॉर्ड बुक जारी होने से पहले ही जमीन का नामांतरण (Mutation) खोल दिया गया। दोषी तहसीलदार और पटवारी ने दफ्तर छोड़कर, घर बैठकर इस पूरे फर्जीवाड़े की तस्दीक की थी।
गाज: निलंबित और नामजद हुए आरोपियों का पूरा ब्योरा
इस महा-घोटाले की परतें खुलने के बाद सरकार ने दोषी प्रशासनिक अमले पर सख्त कार्रवाई की है:
| पदनाम | अधिकारी/आरोपी का नाम | वर्तमान प्रशासनिक कार्रवाई |
| तहसीलदार | रतनलाल भवानी (नाचना नंबर-2 उपनिवेशन) | तत्काल प्रभाव से सस्पेंड (निलंबित)। |
| उप-पंजीयक एवं उप-तहसीलदार | नाथूलाल मीणा (नोख) | तत्काल प्रभाव से सस्पेंड (निलंबित)। |
| खैरवाला पटवार मंडल पटवारी | भंवरलाल | तत्काल प्रभाव से सस्पेंड (निलंबित)। |
| दलाल, बिचौलिए व किसान | 3 मुख्य दलाल, 11 किसान सहित 15 लोग | नोख थाने में नामजद एफआईआर दर्ज, तलाश जारी। |
बड़ा सवाल: एफआईआर के बावजूद पुलिस एक्शन में देरी क्यों?
इस महा-फर्जीवाड़े को लेकर नोख थाने में कुल 15 लोगों के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज हो चुका है, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि जालसाजी में सिर्फ 4 सरकारी कर्मचारी ही सीधे तौर पर शामिल हैं, जबकि शेष 11 आरोपी वे मुख्य दलाल और रसूखदार हैं जिन्होंने अपने और अपने करीबियों के नामों का इस्तेमाल कर करोड़ों के वारे-न्यारे किए।
उपनिवेशन विभाग के सूत्रों के अनुसार, विभागीय सुस्ती और स्थानीय रसूख के कारण पुलिसिया कार्रवाई अभी तक बेहद धीमी है, जिससे मुख्य दलाल फरार होने में कामयाब हो गए हैं। बड़ा सवाल यह भी उठ रहा है कि फलोदी और नाचना में नामजद होने के बावजूद जैसलमेर जिले में तैनात कुछ अन्य दागी कार्मिकों पर अब तक विभागीय एक्शन क्यों नहीं लिया गया? आखिर इन भ्रष्ट कर्मचारियों को किसका राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है?
महानिरीक्षक (पंजीयक व मुद्रांक) भगीरथराम चौधरी का बयान:
“इस गंभीर मामले में अब उपनिवेशन विभाग को सिविल कोर्ट में वाद (केस) दायर करना होगा। वर्तमान में भी सरकारी रिकॉर्ड में यह जमीन ‘राजकीय’ (सरकारी) ही दर्ज है। ऐसे में कोर्ट के ऑर्डर के बाद इस खसरा नंबर की हुई सभी अवैध रजिस्ट्रियों को पूरी तरह से निरस्त (Cancel) कर दिया जाएगा।”
जानकारों का मानना है कि यदि नाचना उपनिवेशन विभाग के पिछले कुछ सालों के लैंड रिकॉर्ड्स की किसी उच्च स्तरीय निष्पक्ष एजेंसी से जांच करवाई जाए, तो ऐसे कई और बड़े जमीन घोटाले सामने आ सकते हैं जहां सरकारी जमीनों को कौड़ियों के भाव या फर्जी दस्तावेजों के सहारे रसूखदारों को बेच दिया गया है।