बूंदी। राजस्थान के बूंदी जिले के लाखेरी शहर स्थित एशिया की दूसरी सबसे पुरानी और ऐतिहासिक एसीसी (ACC) सीमेंट फैक्ट्री पिछले एक महीने से पूरी तरह ठप पड़ी है। लगभग 121 वर्ष पुरानी इस ऐतिहासिक फैक्ट्री में अचानक उत्पादन बंद होने के कारण स्थानीय निवासियों, श्रमिकों और ठेका कर्मचारियों में भारी चिंता और आक्रोश का माहौल है। फैक्ट्री बंद होने से न केवल सैकड़ों परिवारों के सामने गंभीर आर्थिक और रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है, बल्कि पूरे क्षेत्र की व्यावसायिक और आर्थिक गतिविधियां भी ठप होने की कगार पर पहुंच गई हैं।
इस गंभीर औद्योगिक संकट को देखते हुए स्थानीय समाजसेवियों और नागरिकों ने देश के सर्वोच्च नीति-निर्माताओं से फैक्ट्री को पुनः चालू करवाने की गुहार लगाई है।
अंग्रेजों के समय (1905) में हुई थी स्थापना
स्थानीय समाजसेवी मूलचंद शर्मा ने इस औद्योगिक इकाई के स्वर्णिम इतिहास और वर्तमान दुर्दशा को रेखांकित करते हुए बताया कि इस फैक्ट्री की आधारशिला अंग्रेजों के शासनकाल में वर्ष 1905 में रखी गई थी। करीब एक दशक के निर्माण कार्य के बाद वर्ष 1915 से इस इकाई में सीमेंट का वाणिज्यिक उत्पादन विधिवत रूप से चालू हुआ था। यह केवल राजस्थान ही नहीं, बल्कि समूचे एशिया महाद्वीप की दूसरी सबसे पुरानी और ऐतिहासिक सीमेंट फैक्ट्री मानी जाती है।
संसाधनों की प्रचुरता के बाद भी बंद है उत्पादन
विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों का कहना है कि यह फैक्ट्री रणनीतिक और भौगोलिक रूप से बेहद अनुकूल स्थान पर स्थित है:
- बेहतर कनेक्टिविटी: लाखेरी स्थित यह प्लांट देश की सबसे व्यस्त दिल्ली-मुंबई रेल मार्ग और सुदृढ़ सड़क नेटवर्क से सीधे जुड़ा हुआ है, जिससे कच्चे माल और तैयार सीमेंट का परिवहन बेहद आसान है।
- पानी व भूमि की कोई कमी नहीं: फैक्ट्री के बिल्कुल नजदीक से पवित्र चंबल नदी गुजरती है, जिसके कारण प्लांट के संचालन के लिए पानी की प्रचुर उपलब्धता है। इसके साथ ही फैक्ट्री परिसर के पास विस्तार के लिए पर्याप्त मात्रा में अतिरिक्त भूमि भी मौजूद है।
फैक्ट्री बंद होने का असर और वर्तमान स्थिति
| प्रभावित वर्ग / आयाम | जमीनी हकीकत और प्रभाव |
| स्थायी व ठेका श्रमिक | पिछले एक माह से काम बंद होने के कारण दैनिक वेतनभोगी और संविदा परिवारों के सामने भरण-पोषण का संकट। |
| स्थानीय बाजार | श्रमिकों की क्रय शक्ति घटने से लाखेरी और इंद्रगढ़ क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियां मंदी की चपेट में। |
| उत्पादन ठप होने का कारण | प्रबंधन या तकनीकी स्तर पर स्थिति अभी तक पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाई है। |
राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री तक पहुंची गूंज
लाखेरी के नागरिकों और श्रमिक संगठनों की चिंताओं को देखते हुए देश के शीर्ष नेतृत्व को पत्र लिखकर इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने की अपील की गई है। इस संबंध में भारत के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लोकसभा अध्यक्ष, राजस्थान के राज्यपाल और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को विशेष त्राहिमाम पत्र भेजा गया है।
पत्र में मांग की गई है कि यदि उच्च स्तर पर मजबूत इच्छाशक्ति दिखाई जाए, तो इस संकट का निवारण बेहद आसानी से किया जा सकता है। क्षेत्रवासियों ने साफ तौर पर चेतावनी दी है कि यदि सरकार और स्थानीय प्रशासन ने समय रहते इस 121 वर्ष पुरानी फैक्ट्री को दोबारा शुरू कराने के लिए कदम नहीं उठाए, तो सैकड़ों परिवारों के हक और क्षेत्र के आर्थिक वजूद को बचाने के लिए नागरिक उग्र आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।