जयपुर। गर्मी के मौसम में हर साल एक ऐसा दौर आता है जब सूरज अपनी प्रचंडता के चरम पर होता है और धरती आग की तरह तपती है। ज्योतिष और मौसम विज्ञान में इस अवधि को ‘नौतपा’ कहा जाता है। वर्ष 2026 में प्रदेशवासियों को इस भीषण गर्मी का सामना 25 मई से करना होगा।
कब से शुरू होगा नौतपा 2026?
ज्योतिषीय गणनाओं और पंचांग के अनुसार, 25 मई 2026 (सोमवार) को दोपहर 3 बजकर 44 मिनट पर सूर्य देव वृषभ राशि के रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। सूर्य के इस नक्षत्र गोचर के साथ ही नौतपा की शुरुआत हो जाएगी। यद्यपि सूर्य रोहिणी नक्षत्र में 8 जून 2026 तक यानी पूरे 15 दिन रहेंगे, लेकिन प्रवेश के शुरुआती 9 दिन (25 मई से 2 जून तक) सबसे अधिक गर्म माने जाते हैं। इन्हीं 9 दिनों की अवधि को ‘नौतपा’ कहा जाता है।
क्यों बढ़ती है इतनी प्रचंड गर्मी?
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, रोहिणी नक्षत्र के स्वामी चंद्रमा हैं। जब सूर्य इस नक्षत्र में आते हैं, तो उनकी तीव्र ऊर्जा और ताप के कारण चंद्रमा का शीतलता प्रदान करने वाला प्रभाव कम हो जाता है, जिससे गर्मी काफी बढ़ जाती है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी इस दौरान सूर्य की किरणें पृथ्वी पर बिल्कुल लंबवत (सीधी) पड़ती हैं। इससे जमीन और समुद्र का पानी बहुत तेजी से तपता है और लू (Heatwave) का प्रकोप अपने चरम पर पहुंच जाता है।
भीषण गर्मी है अच्छे मानसून का संकेत
नौतपा की यह प्रचंड गर्मी कृषि और आगामी मानसून के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण और शुभ मानी जाती है। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, नौतपा के दौरान जितनी अधिक गर्मी पड़ती है, मानसून में बारिश उतनी ही अच्छी होती है। इन 9 दिनों की तपन से समुद्र का पानी तेजी से वाष्पीकृत होता है, जो बादलों का निर्माण कर प्रचुर मानसूनी बारिश लेकर आता है, जिससे खरीफ की फसलों को फायदा होता है।
इस दौरान रखें ये विशेष सावधानियां
नौतपा की चिलचिलाती धूप और लू से बचने के लिए स्वास्थ्य का ध्यान रखना बेहद जरूरी है:
- बहुत जरूरी न हो तो दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे के बीच चिलचिलाती धूप में घर से बाहर जाने से बचें।
- इस दौरान तीखा, मसालेदार, तला-भुना और मांसाहार खाने से पूरी तरह परहेज करें।
- घर से बाहर अनावश्यक लंबी यात्रा करने से भी बचें।
- नौतपा की प्रचंड गर्मी में मूक पशु-पक्षियों के लिए अपनी छतों या घर के बाहर किसी बर्तन में पानी जरूर रखें।