अक्सर सेहतमंद रहने के लिए डॉक्टर रात को जल्दी सोने की सलाह देते हैं। लेकिन क्या आपके साथ भी ऐसा होता है कि आप रात को 10 बजे ही बिस्तर पर चले जाते हैं, फिर भी सुबह उठने पर शरीर थका-थका और भारी महसूस होता है? दिनभर सुस्ती छाई रहती है और ऐसा लगता है कि नींद पूरी ही नहीं हुई।
हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार, अच्छी और सुकून भरी नींद केवल इस बात पर निर्भर नहीं करती कि आप कितने घंटे सोए हैं (Sleep Quantity), बल्कि इस बात पर निर्भर करती है कि आपकी नींद की गुणवत्ता (Sleep Quality) कैसी थी। हमारी कुछ अनजानी और रोजमर्रा की आदतें हमारे नेचुरल ‘स्लीप साइकल’ को ब्लॉक कर देती हैं, जिससे नींद बार-बार टूटती है। आइए जानते हैं उन 4 मुख्य गलतियों के बारे में जो आपकी गहरी नींद की दुश्मन बनी हुई हैं।

दिनभर फिजिकल एक्टिविटी की कमी (गतिहीन जीवनशैली)
अगर आपकी नौकरी ऐसी है जहां आपको दिनभर कंप्यूटर के सामने बैठे रहना पड़ता है और आप शारीरिक रूप से बहुत कम चलते-फिरते हैं, तो यह आपकी रात की नींद को सीधे प्रभावित करता है। जब तक शरीर शारीरिक रूप से पर्याप्त रूप से नहीं थकता, तब तक दिमाग गहरे स्लीप मोड (Deep Sleep) में नहीं जा पाता। यही वजह है कि 8 घंटे बिस्तर पर बिताने के बाद भी सुबह ताजगी महसूस नहीं होती।
2. दोपहर में लंबी तानकर सोना (Long Afternoon Naps)
काम के बीच में 15-20 मिनट की झपकी (Power Nap) लेना तो फायदेमंद है, लेकिन अगर आप दोपहर में एक से दो घंटे की लंबी नींद लेते हैं, तो आप अपने शरीर के प्राकृतिक क्लॉक को भ्रमित कर रहे हैं। दोपहर की लंबी नींद रात के समय आने वाली गहरी और गुणवत्तापूर्ण नींद की तीव्रता को कम कर देती है, जिससे रातभर करवटें बदलनी पड़ती हैं।
3. कम पानी पीना (माइल्ड डिहाइड्रेशन)
शरीर में पानी की कमी केवल पाचन या त्वचा को ही प्रभावित नहीं करती, बल्कि यह आपकी नींद भी उड़ा सकती है। डिहाइड्रेशन के कारण रात में मुंह सूखना, पैर की मांसपेशियों में ऐंठन (Cramps) और हल्की बेचैनी या सिरदर्द हो सकता है। इस वजह से रात में बार-बार आपकी आंख खुलती है और स्लीप साइकल बाधित होता है।

4. सुबह बार-बार अलार्म को ‘स्नूज़’ करना
सुबह उठने के लिए 5-5 मिनट के अंतराल पर कई अलार्म लगाना और बार-बार ‘स्नूज़’ बटन दबाना सबसे हानिकारक आदतों में से एक है। जब आप अलार्म बजने के बाद दोबारा 5 मिनट के लिए सो जाते हैं, तो आपका दिमाग फिर से एक नए स्लीप साइकल में प्रवेश करने की कोशिश करता है, जो तुरंत टूट जाता है। इस ‘क्रैश-एंड-वेक’ पैटर्न के कारण दिमाग पूरी तरह रिलैक्स नहीं हो पाता और जागने पर भयंकर सुस्ती महसूस होती है।
स्मार्ट टिप: डिजिटल डिटॉक्स भी है जरूरी
इन आदतों के अलावा, बढ़ते स्क्रीन टाइम (सोने से ठीक पहले मोबाइल का इस्तेमाल) से निकलने वाली ‘ब्लू लाइट’ हमारे शरीर में नींद बनाने वाले ‘मेलाटोनिन’ हार्मोन को रोक देती है। इसलिए, अगर सुबह फ्रेश और एनर्जेटिक उठना है, तो सोने से कम से कम 30 मिनट पहले फोन को खुद से दूर कर दें।