राज्यसभा चुनाव 2026: राजस्थान में सियासी हलचल तेज, उम्मीदवारों के चयन के लिए आज बैठेगा भाजपा कोर ग्रुप

Madhu Manjhi

जयपुर। राजस्थान में आगामी राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां चरम पर पहुंच गई हैं। चुनाव आयोग की ओर से इसी महीने (मई 2026) अधिसूचना जारी होने के संकेत हैं, जबकि जून में तीन सीटों पर मतदान होने की संभावना है। इसी सिलसिले में उम्मीदवारों के चयन को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपना मंथन तेज कर दिया है। आज शनिवार को जयपुर में प्रदेश भाजपा कोर ग्रुप की एक हाई-प्रोफाइल बैठक बुलाई गई है, जिसमें संभावित उम्मीदवारों के नामों पर चर्चा कर तीन-तीन नामों का पैनल तैयार किया जाएगा।

दिल्ली भेजा जाएगा तीन-तीन नामों का पैनल

शनिवार को होने वाली इस बैठक में जयपुर में मौजूद कोर ग्रुप के सदस्य प्रत्यक्ष रूप से शामिल होंगे, जबकि अन्य वरिष्ठ नेता वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के जरिए जुड़ेंगे। बैठक का मुख्य एजेंडा राज्यसभा उम्मीदवारों के लिए मजबूत नामों का चयन करना है। तैयार किए गए तीन-तीन नामों के पैनल को अंतिम मंजूरी के लिए दिल्ली स्थित केंद्रीय पार्लियामेंटरी बोर्ड को भेजा जाएगा। इसके अलावा बैठक में आगामी संगठनात्मक कार्यों, ‘ग्राम चौपाल’ और पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण अभियान की प्रगति की भी समीक्षा की जाएगी।

इन तीन सांसदों का कार्यकाल हो रहा है समाप्त

राजस्थान के कोटे की कुल 10 राज्यसभा सीटों में से तीन सीटें जून 2026 में रिक्त हो रही हैं। जिन सांसदों का कार्यकाल पूरा हो रहा है, उनमें शामिल हैं:

  • रवनीत सिंह बिट्टू (भाजपा): पंजाब से ताल्लुक रखने वाले और वर्तमान में केंद्रीय मंत्री बिट्टू उपचुनाव के जरिए राजस्थान से उच्च सदन पहुंचे थे। केंद्र में मंत्री होने के नाते उनके दोबारा नामांकन की चर्चाएं जोरों पर हैं।
  • राजेंद्र गहलोत (भाजपा): मारवाड़ क्षेत्र के कद्दावर नेता और लंबे समय से भाजपा के मजबूत स्तंभ रहे हैं।
  • नीरज डांगी (कांग्रेस): कांग्रेस के प्रमुख दलित चेहरे के रूप में राज्यसभा में राजस्थान का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।

विधानसभा का अंकगणित: किसके खाते में जाएगी कितनी सीट?

राजस्थान विधानसभा की 200 सीटों के वर्तमान दलीय समीकरणों को देखा जाए तो सत्ताधारी भाजपा का पलड़ा भारी है। अपने संख्या बल के आधार पर भाजपा इन तीन में से दो सीटों पर अपनी जीत तय मानकर चल रही है। वहीं, एक सीट मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के खाते में जाने की उम्मीद है।

रणनीतिक बदलाव के संकेत: राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि भाजपा इस बार बाहरी चेहरों के बजाय राजस्थान के स्थानीय और जमीनी कार्यकर्ताओं को मौका दे सकती है, ताकि आगामी संगठनात्मक चुनावों और राज्य के राजनीतिक समीकरणों को साधा जा सके।

भाजपा जहां इन सीटों को जीतकर उच्च सदन (राज्यसभा) में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की स्थिति को और अधिक मजबूत करना चाहती है, वहीं कांग्रेस अपनी इकलौती सीट को सुरक्षित रखने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रही है। निश्चित रूप से जून में होने वाला यह चुनाव प्रदेश की राजनीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा।

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