राजस्थान के वन विभाग में भ्रष्टाचार का एक बड़ा मामला सामने आया है, जिसमें अलवर और सरिस्का के दो डीएफओ (मंडल वन अधिकारी) सीधे तौर पर घेरे में हैं। जयपुर के एक कारोबारी कमलेंद्र सिंह द्वारा प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) में की गई शिकायत के बाद अब राज्य प्रशासन हरकत में आ गया है।
मुख्य आरोप और विवाद
शिकायत के अनुसार, सरिस्का के डीएफओ अभिमन्यु सहारन पर आरोप है कि उन्होंने पांच खानों (माइन) को फिर से शुरू करवाने के लिए सरिस्का सेंचुरी से उनकी दूरी के गलत प्रमाण पत्र जारी किए। जबकि उच्चतम न्यायालय में राज्य सरकार ने शपथ पत्र देकर इन खानों की दूरी अलग बताई थी।
वहीं, अलवर के डीएफओ राजेंद्र हुड्डा पर वृक्षारोपण और मृदा संरक्षण कार्यों में करीब 18 करोड़ रुपये के घोटाले का गंभीर आरोप लगाया गया है।
कारोबारी का अनोखा दावा
इस मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू शिकायतकर्ता कमलेंद्र सिंह का आत्मविश्वास है। उन्होंने अपनी शिकायत के साथ 1 करोड़ रुपये का चेक भी संलग्न किया है। उन्होंने यह चुनौती दी है कि:
“यदि मेरी द्वारा की गई यह शिकायत झूठी पाई जाती है, तो सरकार इस एक करोड़ रुपये के चेक को जब्त कर सकती है।”
जांच प्रक्रिया और समय सीमा
पीएमओ से मामला राजस्थान के मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास के पास पहुंचने के बाद, उन्होंने इसे प्रधान मुख्य वन संरक्षक (PCCF) पवन कुमार उपाध्याय को सौंपा।
- जांच कमेटी: दो सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है।
- सदस्य: अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक उदय शंकर और मुख्य वन संरक्षक डॉ. चंदा राम मीणा।
- डेडलाइन: कमेटी को 7 दिन के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।