करोड़ों का बाईपास घोटाला: फर्जी गजट बनाकर अफसरों ने बदला बाईपास का नक्शा, ACB की कार्रवाई में XEN दबोचा गया

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झुंझुनूं। राजस्थान के झुंझुनूं जिले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने एक ऐसी बड़ी साजिश का पर्दाफाश किया है, जिसने सरकारी सिस्टम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बाईपास के अलाइनमेंट को बदलवाने के नाम पर 33 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) के एक्सईएन (XEN) राकेश कुमार और उनके दलाल याकूब अली को रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया है।

लेकिन यह मामला महज रिश्वतखोरी तक सीमित नहीं है; जांच में सामने आया है कि इस वसूली के खेल के लिए अधिकारियों ने ‘फर्जी सरकारी गजट’ तक तैयार कर दिया था।

33 लाख की डील और चौमूं पुलिया पर ट्रैप

एसीबी के महानिदेशक गोविंद गुप्ता ने बताया कि पीड़ित की जमीन बगड़ बाईपास के दायरे में आ रही थी। इसे बचाने के लिए दलाल याकूब अली और एक्सईएन राकेश कुमार ने शुरुआत में 75 लाख रुपये की मांग की थी, जो बाद में 50 लाख रुपये में तय हुई।

शुक्रवार रात, जैसे ही दलाल याकूब अली ने जयपुर के सीकर रोड स्थित चौमूं पुलिया के पास पीड़ित से 33 लाख रुपये की पहली किस्त ली, एसीबी की टीम ने उसे दबोच लिया। उसकी सूचना पर दूसरी टीम ने चिड़ावा से एक्सईएन राकेश कुमार को भी हिरासत में ले लिया।

महा-खुलासा: फर्जी गजट से वसूली का ब्लूप्रिंट

मामले की गहराई से जांच करने पर पता चला कि बाईपास पर जमीन की खरीद-फरोख्त और वसूली के लिए अफसरों ने कूटनीतिक तरीके से फर्जी गजट नोटिफिकेशन तैयार किया था।

  • मूल गजट बनाम फर्जी गजट: 30 अप्रैल 2025 को जारी असली गजट में बाईपास 8 गांवों (देरवाला, उदावास, बाकरा, इंडाली, खाजपुर नया, जयपहाड़ी, कुलोद कलां और बगड़) से निकलना था।
  • कांट-छांट और जालसाजी: अफसरों ने इस गजट में बदलाव कर गांवों की संख्या 17 कर दी। इसमें खीदरसर, रघुनाथपुरा और चंद्रपुरा जैसे नए गांव जोड़ दिए गए ताकि भू-माफिया को फायदा पहुंचाया जा सके।
  • त्रुटियों से खुली पोल: फर्जी गजट में व्याकरण और वर्तनी की कई गलतियां पाई गईं। ‘बुधवार’ को ‘बुद्धवार’ और ‘पुरोहितों की ढाणी’ को ‘पिरोहितो की ढाणी’ लिखा गया। साथ ही शब्दों के बीच स्पेस न होना और अलग फॉन्ट का इस्तेमाल इसकी जालसाजी की पुष्टि करता है।

60% रजिस्ट्रियों में पहचान-पत्र गायब, भू-माफिया सक्रिय

जांच में यह भी चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि बाईपास के पास खरीदी गई जमीनों की 60% रजिस्ट्रियों में आधार कार्ड या अन्य कोई अनिवार्य सरकारी पहचान-पत्र संलग्न नहीं है।

अलाइनमेंट की जानकारी आधिकारिक रूप से जारी होने से पहले ही लीक कर दी गई थी, जिसका फायदा उठाकर भू-माफियाओं ने करीब 8 हजार बीघा जमीन कौड़ियों के भाव खरीद ली। इनमें कई खरीदार राजस्थान के बाहर के हैं और कुछ ने अलग-अलग स्थानों का निवासी बनकर फर्जी तरीके से जमीनें खरीदी हैं।

प्रक्रिया की अनदेखी

नियमतः पीडब्ल्यूडी में गजट प्रकाशन की फाइल जिला अधिकारियों से मुख्यालय और फिर मंत्री की मंजूरी के बाद राज्यपाल की आज्ञा से गवर्नमेंट प्रेस भेजी जाती है। इस मामले में जांच की जा रही है कि कैसे एक फर्जी प्रति को विज्ञापन के लिए भेज दिया गया और किसी का ध्यान इस पर नहीं गया।

एसीबी अब इस पूरे नेटवर्क और ‘कैश ट्रेल’ की जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस घोटाले के तार और किन बड़े अधिकारियों या रसूखदारों से जुड़े हैं।

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