जयपुर। राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनाव टालने के राज्य सरकार के प्रार्थना पत्र पर आगामी 11 मई को हाईकोर्ट में सुनवाई होगी। राज्य सरकार ने कोर्ट में याचिका दायर कर स्पष्ट किया है कि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए दिसंबर से पहले चुनाव कराना संभव नहीं है। सरकार ने हर महीने की स्थिति का विवरण देते हुए अतिरिक्त समय की मांग की है।
15 अप्रैल की डेडलाइन और सरकार के तर्क
इससे पहले हाईकोर्ट ने सरकार को 15 अप्रैल तक चुनाव कराने के कड़े निर्देश दिए थे। हालांकि, सरकार ने प्रार्थना पत्र के माध्यम से इस समय सीमा में चुनाव कराने में अपनी असमर्थता जताई है। सरकार का तर्क है कि ओबीसी आयोग की रिपोर्ट, स्कूलों की परीक्षाएं, स्टाफ की ड्यूटी और ईवीएम सहित अन्य आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता न होने के कारण चुनाव टालना अनिवार्य है।
चुनाव आयोग का रुख और अवमानना याचिका
राज्य चुनाव आयोग ने भी सरकार के तर्कों का समर्थन करते हुए हाईकोर्ट से चुनाव टालने का अनुरोध किया है। आयोग ने अपनी एप्लीकेशन में कहा है कि ओबीसी रिजर्वेशन के निर्धारण से पहले चुनाव कराना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है। दूसरी ओर, पूर्व विधायक संयम लोढ़ा और गिरिराज सिंह देवंदा द्वारा दायर अवमानना याचिका पर हाईकोर्ट 18 मई को सुनवाई करेगा। इस याचिका में राज्य चुनाव आयोग पर कोर्ट के आदेशों की अवहेलना करने का आरोप लगाया गया है।
‘वन स्टेट-वन इलेक्शन’ पर जोर
सरकार की ओर से यह भी बताया गया कि अक्टूबर से दिसंबर के बीच कई पंचायत समितियों और जिला परिषदों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। सरकार का मानना है कि इन सभी के कार्यकाल की समाप्ति के बाद एक साथ चुनाव कराना अधिक बेहतर होगा। इससे न केवल संसाधनों की बचत होगी, बल्कि ‘वन स्टेट-वन इलेक्शन’ की अवधारणा को भी मजबूती मिलेगी।