कोलाथुर में बड़ा उलटफेर: डीएमके का साथ छोड़ टीवीके में आए वीएस बाबू बने स्टालिन के लिए बड़ी चुनौती, शुरुआती रुझानों में मुख्यमंत्री पीछे

Madhu Manjhi

चेन्नई। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के शुरुआती रुझानों और नतीजों ने पूरे देश को चौंका दिया है। सबसे बड़ा उलटफेर मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन की अपनी पारंपरिक और सुरक्षित मानी जाने वाली कोलाथुर सीट पर देखने को मिल रहा है। अभिनेता विजय की नवगठित पार्टी ‘तमिलगा वेत्री कड़गम’ (TVK) के उम्मीदवार वीएस बाबू ने मुख्यमंत्री स्टालिन पर 7,000 से अधिक मतों की निर्णायक बढ़त बनाकर डीएमके के खेमे में हलचल पैदा कर दी है।

1. स्टालिन के अभेद्य किले में टीवीके की बड़ी सेंध

कोलाथुर निर्वाचन क्षेत्र को लंबे समय से द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) का अभेद्य गढ़ माना जाता रहा है, लेकिन 2026 के चुनावों ने समीकरण बदल दिए हैं। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, टीवीके उम्मीदवार वीएस बाबू वर्तमान में मुख्यमंत्री स्टालिन से 7,361 मतों से आगे चल रहे हैं। तमिलनाडु की 234 सीटों के लिए 23 अप्रैल को हुए मतदान के बाद आए इन रुझानों ने साबित कर दिया है कि ‘थलापति’ विजय की राजनीतिक एंट्री ने राज्य के पारंपरिक द्रविड़ राजनीति के दो-ध्रुवीय ढांचे को हिलाकर रख दिया है。

2. कौन हैं वीएस बाबू? डीएमके का पुराना साथी अब बना ‘विशाल’ चुनौती

75 वर्षीय वीएस बाबू कोई नए चेहरा नहीं हैं, बल्कि तमिलनाडु की राजनीति के एक मझे हुए खिलाड़ी हैं। उनके बारे में कुछ प्रमुख बातें:

  • अनुभवी राजनेता: बाबू के पास दो दशकों से अधिक का गहरा राजनीतिक अनुभव है।
  • पूर्व डीएमके दिग्गज: उन्होंने साल 2006 में डीएमके के टिकट पर पुरासवलकम निर्वाचन क्षेत्र से 90,000 से अधिक वोटों के भारी अंतर से जीत हासिल की थी।
  • विजय के साथ गठबंधन: 7 फरवरी, 2026 को उन्होंने डीएमके का साथ छोड़कर विजय की पार्टी ‘तमिलगा वेत्री कड़गम’ का दामन थाम लिया था।
  • संपत्ति: 2026 के चुनावी हलफनामे के अनुसार, वीएस बाबू ने ₹3.7 करोड़ की कुल संपत्ति घोषित की है।

3. कोलाथुर में हार-जीत के मायने और मुख्य कारण

विशेषज्ञों का मानना है कि मुख्यमंत्री स्टालिन के पिछड़ने के पीछे कई महत्वपूर्ण कारक काम कर रहे हैं। राज्य में लंबे समय से चल रही सत्ता विरोधी लहर (Anti-incumbency) और युवाओं के बीच अभिनेता विजय की जबरदस्त लोकप्रियता ने वीएस बाबू के पक्ष में माहौल तैयार किया है।

कोलाथुर के मैदान में एआईएडीएमके के पी. संथाना कृष्णन और नाम तमिलर काची के सुंदर पांडियन भी ताल ठोक रहे हैं, लेकिन वर्तमान स्थिति में मुख्य मुकाबला केवल वीएस बाबू और एम.के. स्टालिन के बीच ही सिमट कर रह गया है। यदि यह बढ़त जीत में बदलती है, तो यह तमिलनाडु की भावी राजनीति के लिए एक नए युग की शुरुआत होगी।

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