चिकित्सा विभाग का बड़ा फैसला: 599 संविदा फार्मासिस्ट का अनुबंध खत्म, नर्सिंग छात्रों के भरोसे ‘फ्री दवा’ काउंटर

Madhu Manjhi

राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में वित्तीय वर्ष की शुरुआत के साथ ही स्वास्थ्य सेवाओं पर बड़ा संकट खड़ा हो गया है। राज्य सरकार ने प्रदेशभर में लंबे समय से सेवाएं दे रहे 599 संविदा फार्मासिस्ट का अनुबंध आगे न बढ़ाते हुए उनकी सेवाएं समाप्त कर दी हैं। इस फैसले से जहां एक ओर सैकड़ों युवा बेरोजगार हो गए हैं, वहीं दूसरी ओर अस्पतालों में दवा वितरण की व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है।

राजस्थान चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं निदेशालय ने एक बड़ा फैसला लेते हुए प्रदेश के 41 जिलों में कार्यरत 599 संविदा फार्मासिस्ट की सेवाओं पर ‘कैंची’ चला दी है। इन फार्मासिस्टों का अनुबंध 31 मार्च को समाप्त हो गया था, जिसे विभाग ने आगे नहीं बढ़ाया है।

रोजगार का संकट और अस्पतालों में ‘ओवरलोड’

  • बेरोजगारी की मार: अनुबंध खत्म होने से 599 युवाओं के सामने अचानक आजीविका का संकट खड़ा हो गया है।
  • नियमित स्टाफ पर बोझ: संविदा कर्मियों के हटने से नियमित फार्मासिस्टों पर काम का बोझ इतना बढ़ गया है कि वे साप्ताहिक अवकाश (Weekly Off) तक नहीं ले पा रहे हैं।
  • सुरक्षा पर सवाल: कई अस्पतालों में अब एएनएम, जीएनएम और प्रशिक्षु नर्सिंग विद्यार्थियों के जरिए दवाएं बंटवाई जा रही हैं, जिससे दवा वितरण में गलती होने का खतरा बढ़ गया है।

विचित्र नीति: नए की भर्ती, पुराने की छुट्टी

विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं क्योंकि गत वर्ष 14 नवंबर को राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड के जरिए 674 नए संविदा फार्मासिस्टों की भर्ती की गई थी। लेकिन इसके महज चार महीने बाद ही सालों से काम कर रहे 599 पुराने अनुभवी कर्मियों को हटा दिया गया।

बांसवाड़ा: जनजाति क्षेत्र में बिगड़े हालात

बांसवाड़ा जिले के सबसे बड़े अस्पताल में औसत 1250 से 1300 की ओपीडी रहती है। यहाँ 3 निःशुल्क दवाघरों को संभालने के लिए पहले 2 नियमित और 4 संविदा फार्मासिस्ट थे। अब 4 संविदा कर्मियों के हटने से केवल 2 नियमित फार्मासिस्टों के भरोसे हजारों मरीजों की जिम्मेदारी आ गई है।

दवाओं का गणित: चूक पड़ सकती है भारी

अस्पतालों के स्तर के अनुसार दवाओं की विविधता अत्यधिक है, जहाँ एक छोटी सी गलती जानलेवा हो सकती है:

  • मेडिकल कॉलेज अस्पताल: 1822 प्रकार की दवाएं।
  • उप जिला अस्पताल: 1097 प्रकार की दवाएं।
  • सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र (CHC): 771 प्रकार की दवाएं।
  • प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र (PHC): 546 प्रकार की दवाएं।

अधिकारी का पक्ष: “पूरे प्रदेश में संविदा फार्मासिस्ट की सेवाएं हटाई गई हैं और उनका अनुबंध आगे नहीं बढ़ा है। फिलहाल मौजूदा स्टाफ से व्यवस्थाएं बना रहे हैं और उच्चाधिकारियों को स्थिति से अवगत कराया गया है।” — डॉ. खुशपालसिंह, सीएमएचओ


संपादकीय टिप्पणी: “अनुभवी फार्मासिस्टों को एक झटके में हटाना न केवल उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ है, बल्कि यह प्रदेश की स्वास्थ्य सुरक्षा व्यवस्था के लिए भी एक बड़ा जोखिम है। बिना विशेषज्ञ के दवा वितरण किसी बड़ी दुर्घटना को न्योता दे सकता है।”

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