भारत के अधिकांश राज्यों (पूर्वोत्तर को छोड़कर) में गर्मी ने अपना प्रचंड रूप दिखाना शुरू कर दिया है। वर्तमान में अधिकतम तापमान 40°C से 47°C के बीच बना हुआ है। हाल ही में यूपी, राजस्थान और महाराष्ट्र के कई शहरों में पारा 46°C के पार चला गया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, जब तापमान 40°C के पार जाता है, तो शरीर के लिए ‘हीट स्ट्रोक’ (लू लगना) का जोखिम काफी बढ़ जाता है।
क्या होता है हीट स्ट्रोक?
हीट स्ट्रोक एक इमरजेंसी मेडिकल कंडीशन है। इसमें शरीर का तापमान 40°C (104°F) या उससे ऊपर पहुंच जाता है। इस स्थिति में शरीर की तापमान नियंत्रित करने की प्राकृतिक क्षमता (थर्मोरेगुलेशन) पूरी तरह फेल हो जाती है। यदि समय पर इलाज न मिले, तो यह दिमाग, हृदय और किडनी जैसे अंगों को स्थायी नुकसान पहुँचा सकता है और जानलेवा भी साबित हो सकता है।
हीट स्ट्रोक के 6 गंभीर संकेत (Symptoms)
अगर आपको या आपके आस-पास किसी व्यक्ति में ये लक्षण दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें:
- तेज बुखार: शरीर का तापमान 104°F से ऊपर पहुंच जाना।
- पसीना न आना: त्वचा का लाल, गर्म और सूखा हो जाना (पसीना आना बंद होना)।
- मानसिक स्थिति में बदलाव: भ्रम (Confusion), बोलने में लड़खड़ाहट या दौरे पड़ना।
- तेज सिरदर्द और चक्कर: सिर में असहनीय दर्द और बार-बार चक्कर आना।
- जी मिचलाना: उल्टी महसूस होना या बार-बार उबकाई आना।
- तेज धड़कन: पल्स रेट का अचानक बहुत तेज हो जाना।
हीट एग्जॉशन vs हीट स्ट्रोक: अंतर समझें
अक्सर लोग इन दोनों स्थितियों में भ्रमित हो जाते हैं, जबकि इनकी गंभीरता अलग है:
| विशेषता | हीट एग्जॉशन (Heat Exhaustion) | हीट स्ट्रोक (Heat Stroke) |
| तापमान | 37°C से 40°C के बीच | 40°C (104°F) से अधिक |
| पसीना | बहुत ज्यादा पसीना आता है | पसीना आना बंद हो जाता है |
| स्थिति | आराम और पानी से ठीक हो सकता है | यह एक मेडिकल इमरजेंसी है |
| लक्षण | कमजोरी, थकान, ठंडी-नम त्वचा | बेहोशी, कन्फ्यूजन, गर्म-सूखी त्वचा |
किन्हें है सबसे ज्यादा खतरा?
यूं तो गर्मी हर किसी को प्रभावित करती है, लेकिन बच्चे, बुजुर्ग और ऐसे लोग जो घंटों धूप में बाहर काम करते हैं (जैसे मजदूर या डिलीवरी बॉय), उन्हें हीट स्ट्रोक का सबसे अधिक रिस्क रहता है।
बचाव के आसान तरीके
- हाइड्रेटेड रहें: प्यास न लगने पर भी पर्याप्त पानी पिएं। ओआरएस (ORS) या नींबू पानी का सेवन करें।
- सही समय पर बाहर निकलें: दोपहर 12 बजे से 4 बजे के बीच सीधी धूप में निकलने से बचें।
- ढीले कपड़े पहनें: हल्के रंग के और सूती कपड़े पहनें ताकि शरीर को हवा मिलती रहे।
- ठंडी जगह का चुनाव: पंखे, कूलर या एसी का प्रयोग करें और बार-बार ठंडे पानी से शरीर को पोंछते रहें।