शहर के अंबाबाड़ी इलाके में द्रव्यवती नदी के प्राकृतिक बहाव क्षेत्र पर बड़े पैमाने पर अतिक्रमण का मामला सामने आया है। यहाँ नदी का जो बहाव क्षेत्र कभी 900 फीट चौड़ा हुआ करता था, वह भू-माफियाओं और अवैध कब्जों की वजह से सिमटकर अब मात्र 300 फीट रह गया है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और विकास प्राधिकरण ने मोर्चा खोल दिया है।
600 फीट क्षेत्र में मिट्टी डालकर किया गया कब्जा
मिली जानकारी के अनुसार, अंबाबाड़ी तिराहे के पास स्थित खातेदारी जमीन से गुजरने वाले नदी के बहाव क्षेत्र में अवैध रूप से मिट्टी भरकर उसका रास्ता बदल दिया गया है। लगभग 600 फीट के क्षेत्र को पाट दिया गया है, जिससे नदी एक संकरे नाले में तब्दील हो गई है। यहाँ तक कि नदी की जमीन पर अवैध पार्किंग भी विकसित कर दी गई है।
प्रशासन ने खटखटाया कोर्ट का दरवाजा
इस बेशकीमती जमीन को भू-माफियाओं के चंगुल से छुड़ाने के लिए प्रशासन अब कोर्ट पहुँच गया है। तहसील कार्यालय और विकास प्राधिकरण की ओर से सोमवार को एसडीएम कोर्ट में दावा पेश किया गया है। प्रशासन की मांग है कि इस विवादित भूमि को तुरंत ‘सरकारी’ घोषित किया जाए ताकि यहाँ से अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया शुरू की जा सके।
जलभराव और बाढ़ का बढ़ा खतरा
नदी के बहाव क्षेत्र में रुकावट आने से झोटवाड़ा पुलिया और अंबाबाड़ी के आस-पास के इलाकों में भारी बारिश के दौरान जलभराव का खतरा पैदा हो गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्राकृतिक रास्ता रुकने से बरसाती पानी की निकासी प्रभावित हो रही है, जिससे भविष्य में बड़ी जन-धन की हानि हो सकती है।
10 साल की सुरक्षा पर भारी पड़ी लापरवाही
हैरानी की बात यह है कि करीब 10 साल पहले इन वाटर बॉडीज को संरक्षित घोषित किया गया था। प्रोजेक्ट के दौरान इन्हें जानबूझकर पक्का नहीं किया गया था ताकि प्राकृतिक बहाव बना रहे। लेकिन निगरानी में कमी का फायदा उठाकर भू-माफियाओं ने यहाँ मिट्टी पाटकर प्लाटिंग और पार्किंग का काम शुरू कर दिया। अब प्रशासन का कहना है कि कोर्ट का फैसला आते ही बड़े स्तर पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी।