एसओजी का खुलासा: फोटो मॉर्फिंग और एआई से बनाए फर्जी आईडी कार्ड, डमी कैंडिडेट्स के जरिए पास कराई परीक्षा

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रीट परीक्षा-2022 पेपर लीक मामले में एसओजी की जांच तेज हो गई है। 10 हजार के इनामी आरोपी सुनील बिश्नोई की गिरफ्तारी के बाद जालौर, सांचौर, सिरोही और बाड़मेर जिलों में 40 से अधिक फर्जी अभ्यर्थियों के जरिए परीक्षा पास कराने का खुलासा हुआ है। एसओजी अब इन संदिग्ध अभ्यर्थियों की पहचान के लिए उनके फोटो और आईडी कार्ड की एफएसएल (FSL) जांच करा रही है। साथ ही परीक्षा केंद्रों पर बैठे डमी कैंडिडेट व असली अभ्यर्थियों के बीच मिलान कर रहे हैं। एडीजी विशाल बंसल के अनुसार, संदिग्धों की पहचान के लिए फेस रिकग्निशन सॉफ्टवेयर काम में ले रहे हैं।

सुनील बिश्नोई से पूछताछ में खुलासे: फोटो मॉर्फिंग से बने फर्जी आईडी

पूछताछ में सामने आया है कि फर्जी अभ्यर्थियों को परीक्षा में बैठाने के लिए आवेदन फॉर्म में लगी फोटो और परीक्षा केंद्र पर प्रस्तुत आईडी का मिलान किया जा रहा है। इससे फर्जी पहचान पत्र तैयार करने के तरीके सामने आएंगे। जांच में यह भी स्पष्ट हुआ कि फर्जी अभ्यर्थियों के लिए फोटो मॉर्फिंग और डिजिटल क्लोनिंग तकनीक का इस्तेमाल किया गया। यह काम एक ई-मित्र केंद्र पर किया गया था, जिसकी जानकारी एसओजी जुटा रही है।

ऐसे बनाए गए दस्तावेज

जालसाजों ने असली और डमी अभ्यर्थियों के चेहरों को सॉफ्टवेयर से मिक्स कर समानता बनाई, ताकि परीक्षा केंद्र पर संदेह न हो। इसके बाद एडोब फोटोशॉप और एआई टूल्स से आधार कार्ड की डिजिटल लेयरिंग कर हाई क्वालिटी पीवीसी प्रिंटर से असली जैसे आईडी कार्ड तैयार किए गए। अब एफएसएल में फोटो की पिक्सेल डेंसिटी, किनारों के सूक्ष्म बदलाव और स्याही के अंतर की जांच कर डिजिटल छेड़छाड़ का पता लगाया जा रहा है।

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