RGHS पर रार बरकरार: निजी अस्पतालों का पूर्ण बहिष्कार, नई TID जनरेट करने से इनकार; इलाज के अभाव में मरीज बेहाल

Madhu Manjhi

राजस्थान सरकार की महत्वाकांक्षी राजस्थान हेल्थ स्कीम (RGHS) को लेकर सरकार और निजी अस्पतालों के बीच का विवाद अब और गहरा गया है। आईएमए (IMA) राजस्थान के आह्वान पर भीलवाड़ा सहित पूरे प्रदेश में निजी अस्पतालों ने योजना का पूर्ण बहिष्कार शुरू कर दिया है। हालात यह हैं कि अस्पतालों में उपचार के लिए पहुंचने वाले सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स को बिना इलाज कराए ही वापस लौटना पड़ रहा है।

नई TID जनरेट करने पर रोक निजी अस्पतालों ने कड़ा रुख अपनाते हुए साफ कर दिया है कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लेती, तब तक नई टीआइडी (TID) जनरेट नहीं की जाएगी। इसके चलते भर्ती होने वाले नए मरीजों की प्रक्रिया पूरी तरह ठप हो गई है। अस्पतालों के काउंटरों पर सन्नाटा पसरा है और कर्मचारी मरीजों को प्रक्रिया बंद होने का हवाला देकर मना कर रहे हैं।

आक्रोश की वजह: क्लेम में देरी और पुलिसिया कार्रवाई चिकित्सक संगठनों का आरोप है कि सरकार लंबे समय से क्लेम सेटलमेंट में देरी कर रही है, जिससे अस्पतालों का आर्थिक ढांचा चरमरा गया है। इसके साथ ही, तकनीकी खामियों को गंभीर अपराध मानकर डॉक्टरों के खिलाफ की जा रही दंडात्मक कार्रवाई ने इस गुस्से को और भड़का दिया है। विशेष रूप से जयपुर में डॉ. सोनदेव बंसल की गिरफ्तारी के बाद चिकित्सकों का यह आक्रोश प्रदेशव्यापी आंदोलन में बदल चुका है।

अनिश्चितकालीन बहिष्कार की चेतावनी आईएमए भीलवाड़ा के अध्यक्ष डॉ. दुष्यंत शर्मा और अन्य प्रतिनिधियों का कहना है कि मामूली त्रुटियों पर जिस तरह से डॉक्टरों को प्रताड़ित किया जा रहा है, वह असहनीय है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि सरकार संवाद के जरिए जल्द समाधान नहीं निकालती, तो यह बहिष्कार अनिश्चितकाल के लिए जारी रह सकता है। डॉक्टरों ने लाभार्थियों से सहयोग की अपील की है, लेकिन वर्तमान में मरीजों की लाचारी बढ़ती ही जा रही है।

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