राजधानी के मुरलीपुरा सर्किल स्थित वाल्मीकि उद्यान में इन दिनों बच्चों के खेलने के बजाय ‘भ्रष्टाचार के झूले’ झूल रहे हैं। नगर निगम के एक सैनेटरी इंस्पेक्टर (SI) ने नियम-कायदों को ताक पर रखकर जेडीए के स्वामित्व वाले इस पार्क को महज 21 हजार रुपए में दो महीने के लिए एक निजी मेला संचालक को सौंप दिया। जब स्थानीय लोगों ने पार्क में भारी-भरकम झूले लगते देखे और आपत्ति जताई, तब इस पूरे “मेला घोटाले” का भंडाफोड़ हुआ।
निगम की रसीद और जेडीए की अज्ञानता
हैरानी की बात यह है कि जब लोग विरोध करने पहुंचे, तो मेला संचालक ने नगर निगम द्वारा काटी गई रसीद दिखाई और दावा किया कि उसने ग्रीष्मकालीन मेले के लिए विधिवत अनुमति ली है।
- निगम का तर्क: मुरलीपुरा जोन के उपायुक्त पवन शर्मा का कहना है कि निगम ने मेला लगाने की अनुमति नहीं दी है, क्योंकि पार्क जेडीए का है। एसआई ने जो रसीद काटी है, वह केवल ‘कैरिंग चार्ज’ के हिसाब से है।
- जेडीए का पक्ष: जेडीए के एक्सईएन कैलाश बैरवा ने साफ किया कि उन्होंने ऐसी कोई अनुमति नहीं दी है और यह जांच का विषय है कि निगम के कागज पर जेडीए के पार्क में मेला कैसे लग रहा है।
सुरक्षा के साथ खिलवाड़: दमकल-एम्बुलेंस का रास्ता नहीं
मुरलीपुरा स्कीम कपड़ा एवं रेडीमेड व्यापार मंडल के अध्यक्ष अरुण कुमार व्यास और स्थानीय निवासियों ने प्रशासन को गंभीर चेतावनी दी है:
- संकरी गलियां: पार्क के चारों ओर घनी आबादी और संकरी गलियां हैं। यदि कोई हादसा होता है, तो वहां दमकल या एम्बुलेंस का पहुँचना नामुमकिन होगा।
- दस्तावेजों का अभाव: मेले के पास न तो पुलिस प्रशासन की स्वीकृति है और न ही फायर विभाग की एनओसी (NOC)।
- अवैध संरक्षण: सवाल उठ रहा है कि जब पार्क जेडीए के संधारण में है, तो निगम का कर्मचारी रसीद काटकर इस अवैध गतिविधि को संरक्षण कैसे दे सकता है?
किसने क्या कहा? (पक्ष-विपक्ष)
मेला संचालक (पवन शर्मा): “हमने नगर निगम से दो महीने के लिए पार्क लिया है। छुट्टियों में मेला लगा रहे हैं, टिकट लेकर ही प्रवेश मिलेगा।”
उपायुक्त, निगम (पवन शर्मा): “अनुमति नहीं दी गई। रसीद केवल कैरिंग चार्ज की है, क्योंकि पार्क जेडीए का है।”
एक्सईएन, जेडीए (कैलाश बैरवा): “हमने कोई अनुमति नहीं दी। निगम की अनुमति से मेला कैसे लग रहा है, इसकी जांच कराएंगे।”