राजस्थान के शिक्षा विभाग की एक नई पहल ‘सार्थक नाम अभियान’ ने प्रदेश में एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। विभाग का उद्देश्य उन बच्चों के नाम बदलना था जिनके नाम पुराने, नकारात्मक या सामाजिक रूप से असहज करने वाले हैं। लेकिन, विभाग द्वारा जारी की गई 1409 लड़कों और 1529 लड़कियों के नामों की सूची ने लोगों की समझ और विभाग की मंशा पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
लिस्ट में अजीबोगरीब नामों की भरमार
हैरानी की बात यह है कि ‘सार्थक’ नाम सुझाने के नाम पर विभाग ने ऐसी सूची जारी की है जिसमें अहंकार, भयंकर, मक्खी, दहीभाई, दगड़ूराम, भिक्षा, अंहकार, संघर्ष, छीतर और छबीलदास जैसे नाम शामिल हैं। अभिभावकों का कहना है कि जिन नामों को हटाने की बात हो रही थी, विभाग ने उनसे भी अधिक अजीब और अटपटे नाम सुझाव के तौर पर दे दिए हैं। इसके अलावा, ‘अकबर’ जैसे नामों के ऐतिहासिक संदर्भों को लेकर भी बहस शुरू हो गई है।
विपक्ष और अभिभावक संघ ने मोर्चा खोला
संयुक्त अभिभावक संघ के प्रदेश प्रवक्ता अभिषेक जैन बिट्टू ने इसे शिक्षा व्यवस्था के साथ ‘कुठाराघात’ बताया है। उनका कहना है कि नाम रखना परिवार का निजी अधिकार है और सरकार को इसमें दखल देने के बजाय स्कूलों की बदहाल व्यवस्था और शिक्षा की गुणवत्ता पर ध्यान देना चाहिए।
वहीं, कांग्रेस नेता प्रताप सिंह खाचरियावास ने भी सरकार को घेरते हुए कहा कि यह अभियान बेतुका है। उन्होंने सवाल किया कि क्या सरकार अब यह तय करेगी कि घर में बच्चे का नाम क्या होगा?
शिक्षा मंत्री की सफाई
चौतरफा घिरने के बाद शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने सफाई पेश की है। उन्होंने कहा, “यह केवल एक सुझाव है, किसी पर कोई दबाव नहीं है। अगर विभाग की सूची में कोई त्रुटि या निरर्थक नाम शामिल हो गए हैं, तो उन्हें तुरंत ठीक करवाया जाएगा। अभिभावक अपनी पसंद का कोई भी सार्थक नाम रख सकते हैं, शिक्षक केवल उन्हें मार्गदर्शन देंगे।”
मुद्दों से भटकाने का आरोप
भीम आर्मी और अन्य सामाजिक संगठनों का आरोप है कि प्रदेश में स्कूलों की हालत जर्जर है और निजी स्कूलों की मनमानी जारी है, लेकिन विभाग इन असली मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए इस तरह के विवादित अभियान चला रहा है। फिलहाल, सोशल मीडिया पर भी इस लिस्ट का जमकर मजाक उड़ रहा है और लोग पूछ रहे हैं कि क्या वाकई ये ‘सार्थक’ नाम हैं?