कलेक्ट्रेट में सजा आपदा प्रबंधन का महा-ब्लूप्रिंट: ढीले बिजली तारों से लेकर तालाबों की मरम्मत तक

Madhu Manjhi

जयपुर। आगामी मानसून सत्र 2026 के दौरान गुलाबी नगरी और ग्रामीण जयपुर को जलभराव तथा संभावित बाढ़ की विधिक विभीषिका से सुरक्षित रखने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गया है। सोमवार को कलेक्ट्रेट सभागार में जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की एक अत्यंत महत्वपूर्ण और उच्च स्तरीय विधिक बैठक जिला कलक्टर एवं प्राधिकरण के अध्यक्ष संदेश नायक की अध्यक्षता में आयोजित हुई। बैठक में कलक्टर ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया कि आपदा के दौरान एक भी नागरिक की जान-माल को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए और आमजन की विधिक सुरक्षा ही जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने चेताया कि मानसून के दौरान किसी भी आपात स्थिति से निपटने में कोई ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी; सभी संबंधित 15 से अधिक विभाग आपसी विधिक समन्वय (Coordination) के साथ ग्राउंड पर उतरकर कार्य करें।

“कागजी सफाई नहीं चलेगी, इंजीनियर्स दें सफाई का प्रमाणीकरण”

बैठक के दौरान जिला कलक्टर ने नगर निगम (ग्रेटर व हेरिटेज) के अधिकारियों को जयपुर शहर की सीवर लाइनों और सभी छोटे-बड़े गंदे नालों की तत्काल विधिक सफाई कराने के कड़े निर्देश दिए। इस बार पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कलक्टर ने नया विधिक नियम लागू करते हुए कहा कि नाला सफाई के बाद संबंधित अधिशाषी अभियंता (XEN) और सहायक अभियंता (AEN) को अपनी देखरेख में हुई सफाई का आधिकारिक ‘प्रमाणीकरण’ (Certification) जारी करना होगा। केवल यही नहीं, कलक्टर ने सभी उपखण्ड अधिकारियों (SDMs) और तहसीलदारों को निर्देश दिए हैं कि वे विशेष विधिक टीमें बनाकर इन नालों के भौतिक सत्यापन (Physical Verification) की औचक जांच करें, ताकि भ्रष्टाचार या लापरवाही की कोई गुंजाइश न रहे।

मानसून 2026: विभागवार आवंटित विधिक जिम्मेदारियां और कार्य योजना

जयपुर जिले को सुरक्षित रखने के लिए जिला कलक्टर संदेश नायक द्वारा विभिन्न विभागों को सौंपी गई महत्वपूर्ण गाइडलाइंस का विधिक विवरण इस प्रकार है:

  • जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED): मानसून के दौरान दूषित जलापूर्ति (Contaminated Water) की शिकायतों को रोकने के लिए पेयजल लाइनों की निरंतर विधिक मॉनिटरिंग की जाएगी। जल जनित बीमारियों (Water-borne diseases) की रोकथाम के लिए क्लोरीन और स्वच्छ पेयजल की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
  • जयपुर विद्युत वितरण निगम (JVVNL): बिजली विभाग के अधिकारियों को मानसून से पहले सभी ढीले तारों को कसवाने, जमीन पर या जलभराव वाले क्षेत्रों में रखे गए ट्रांसफार्मरों (Transformers) को विधिक रूप से ऊंचे चबूतरों पर शिफ्ट करने तथा उनके चारों ओर कड़े सुरक्षा अवरोधक (Barricades) लगाने के निर्देश दिए गए हैं ताकि करंट फैलने के हादसों को रोका जा सके।
  • जल संसाधन विभाग: जिले के सभी छोटे-बड़े तालाबों और बांधों की विधिक निगरानी की जाएगी। नदी-नालों के बहाव क्षेत्र में पड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्गों (National Highways) और राज्य राजमार्गों की रपटों व पुलों पर पानी का बहाव तेज होने की स्थिति में तत्काल ‘चेतावनी बोर्ड’ (Warning Boards) स्थापित किए जाएंगे।
  • चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग (CMHO): मानसून के दौरान मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों की रोकथाम के लिए व्यापक स्तर पर फॉगिंग और ‘एंटी-लार्वा एक्टिविटी’ चलाई जाएगी। अस्पतालों में जीवन रक्षक दवाओं (Life-saving medicines) का पर्याप्त स्टॉक विधिक रूप से आरक्षित रखने के निर्देश दिए गए हैं।

जर्जर भवनों का होगा विधिक ऑडिट; रसद विभाग रखेगा ईंधन का बैकअप

सुरक्षा ऑडिट के दायरे को बढ़ाते हुए जिला कलक्टर ने शिक्षा विभाग और महिला व बाल विकास विभाग को पाबंद किया है कि जिले के सभी पुराने, जीर्ण-शीर्ण सरकारी व निजी विद्यालय भवनों, आंगनबाड़ी केंद्रों और पुरानी निजी हवेलियों का त्वरित विधिक निरीक्षण कर उन्हें चिन्हांकित किया जाए, ताकि किसी भी हादसे से पहले उन्हें खाली कराया जा सके या आवश्यक मरम्मत सुनिश्चित की जा सके। इसके साथ ही, जिला रसद अधिकारी (DSO) को आपातकालीन स्थितियों के लिए पर्याप्त मात्रा में रसोई गैस (LPG), केरोसीन, डीजल, पेट्रोल और आवश्यक सूखा राशन (खाद्य सामग्री) का बफर स्टॉक तैयार रखने का विधिक जिम्मा सौंपा गया है।

नागरिक सुरक्षा की कमान: तैनात होंगे दक्ष तैराक और गोताखोर

बाढ़ नियंत्रण और रेस्क्यू ऑपरेशंस को गति देने के लिए नागरिक सुरक्षा (Civil Defense) के उपनियंत्रक को विशेष निर्देश जारी किए गए हैं। जिला कलक्टर ने कहा कि बाढ़ बचाओ टीम (Flood Rescue Team) में आवश्यकतानुसार पूरी तरह से दक्ष और अत्याधुनिक उपकरणों से लैस प्रशिक्षित तैराकों, गोताखोरों (Divers) और रेस्क्यूअर स्वयंसेवकों की विधिक नियुक्तियां तुरंत प्रभाव से सुनिश्चित की जाएं। उपखण्ड स्तर पर आपदा प्रबंधन हेतु आवश्यक न्यूनतम विधिक संसाधनों (जैसे बोट, लाइफ जैकेट, रस्सियां आदि) की उपलब्धता की जिम्मेदारी स्थानीय एसडीएम को दी गई है।

इस अत्यंत महत्वपूर्ण रणनीतिक बैठक में अतिरिक्त जिला कलेक्टर (जयपुर दक्षिण) युगांतर शर्मा सहित जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA), सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD), एसडीआरएफ (SDRF), गृह रक्षा विभाग, उत्तर-पश्चिम रेलवे (NWR), जयपुर मेट्रो और पुलिस विभाग के आला विधिक व प्रशासनिक अधिकारी मुस्तैदी से उपस्थित रहे।

Live Sach – तेज़, भरोसेमंद हिंदी समाचार। राजनीति, राजस्थान से ब्रेकिंग न्यूज़, मनोरंजन, खेल और भारत की हर बड़ी खबर!

Share This Article