मारवाड़ क्षेत्र के औद्योगिक और सामरिक विकास को नई गति देने के लिए रेलवे ने एक बड़ा कदम उठाया है। जोधपुर से बिलाड़ा तक करीब 115 साल पहले पहुंची रेल लाइन के अब ‘रास’ (ब्यावर) तक विस्तार का रास्ता साफ हो गया है। उत्तर पश्चिम रेलवे ने इस 850 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार कर रेल मंत्रालय को भेज दी है।
58 किलोमीटर कम होगा सफर, बचेगा समय
इस नई रेल लाइन के बिछने से जोधपुर और ब्यावर के बीच की दूरी में भारी कमी आएगी। वर्तमान में ब्यावर से मारवाड़ जंक्शन होकर जोधपुर पहुंचने के लिए 191 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है। नया मार्ग (बिलाड़ा-जैतारण-रास) तैयार होने के बाद यह दूरी घटकर मात्र 133 किलोमीटर रह जाएगी। इससे यात्रियों का करीब एक घंटे का समय बचेगा।
इन क्षेत्रों से होकर गुजरेगी ट्रेन
प्रस्तावित योजना के तहत बिलाड़ा को जैतारण, निंबोल और टूकड़ा होते हुए रास से जोड़ा जाएगा। रास पहले से ही ब्यावर रेल मार्ग से जुड़ा हुआ है, जिससे यह पूरा खंड एक बड़े नेटवर्क का हिस्सा बन जाएगा। रेलवे ने इसके लिए भूमि अधिग्रहण (Land Acquisition) की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है और अब बस अंतिम वित्तीय स्वीकृति का इंतजार है।
औद्योगिक और सामरिक महत्व
जोधपुर मंडल के डीआरएम अनुराग त्रिपाठी ने अपनी रिपोर्ट में इस रेलखंड को ‘गेम-चेंजर’ बताया है।
विकास की नई पटरी: इस क्षेत्र में लाइमस्टोन, ग्रेनाइट, चाइना क्ले और सीमेंट उद्योगों की बड़ी मौजूदगी है। रेल संपर्क सुलभ होने से माल ढुलाई आसान होगी और स्थानीय व्यापार को वैश्विक पहचान मिलेगी। साथ ही, कम दूरी होने के कारण सामरिक दृष्टि से भी यह मार्ग सेना के मूवमेंट के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा।
115 साल का लंबा इंतजार खत्म
बिलाड़ा रेलमार्ग का इतिहास काफी पुराना है। साल 1905 में पहली बार पीपाड़ रोड से बिलाड़ा के बीच नेरो गेज लाइन स्वीकृत हुई थी। दशकों तक मीटर गेज रहने के बाद 2008 में इसे ब्रॉडगेज में बदला गया। अब 115 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद इसके विस्तार की योजना धरातल पर उतरने जा रही है, जिससे जैतारण और आसपास के कस्बों के लोग पहली बार रेल सेवा से सीधे जुड़ेंगे।