राजस्थान में औद्योगिक विकास और निवेश को बढ़ावा देने की दिशा में रीको (RIICO) ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। रीको ने राजस्थान वित्त निगम (RFC) को उसके पास लंबे समय से खाली पड़ी जमीनों और प्रॉपर्टीज को बेचने की आधिकारिक मंजूरी दे दी है। इस फैसले के बाद अब प्रदेश के विभिन्न इंडस्ट्रियल क्षेत्रों में ठप पड़े प्रोजेक्ट्स को फिर से गति मिल सकेगी।
इन शहरों की जमीनों का होगा कायाकल्प
रीको ने बांसवाड़ा, कोटा, अलवर, झुंझुनूं, आबूरोड, बालोतरा, जालौर और भिवाड़ी जैसे महत्वपूर्ण इंडस्ट्रियल एरिया में RFC को कार्यालय और आवासीय उपयोग के लिए प्लॉट आवंटित किए थे। लंबे समय से इन जमीनों पर कोई गतिविधि नहीं हो रही थी। अब मंजूरी मिलने के बाद RFC इन प्लॉट्स को बेच सकेगा, जिससे नई कंपनियों और निवेशकों के लिए जमीन उपलब्ध हो पाएगी।
रियायती प्लॉट्स के लिए रखी गई कड़ी शर्त
रीको ने स्पष्ट किया है कि जमीन बेचने की प्रक्रिया पारदर्शी और नियमों के तहत होगी:
- मार्केट रेट वाले प्लॉट: जिन जमीनों को बाजार दर पर खरीदा गया था, उन्हें बेचने के लिए सीधे एनओसी (NOC) दे दी गई है।
- रियायती प्लॉट: जो प्लॉट सब्सिडी या सस्ती दरों पर लिए गए थे, उन्हें बेचने से पहले RFC को मिली हुई छूट की राशि ब्याज सहित रीको में जमा करानी होगी।
- उपयोग की शर्त: जमीन का लैंड-यूज़ नहीं बदला जा सकेगा। जिस उद्देश्य (इंडस्ट्रियल या कमर्शियल) के लिए जमीन आवंटित की गई थी, उसका उपयोग उसी काम के लिए होगा।
प्रदेश को क्या होगा लाभ?
इस फैसले से राज्य की अर्थव्यवस्था और औद्योगिक ढांचे को कई स्तरों पर लाभ मिलने की उम्मीद है:
- नया निवेश: प्राइम लोकेशन पर मौजूद जमीनों के बाजार में आने से नए निवेशक आकर्षित होंगे।
- रोजगार के अवसर: नई इंडस्ट्रियल यूनिट्स और कमर्शियल ऑफिस बनने से स्थानीय स्तर पर युवाओं को रोजगार मिलेगा।
- राजस्व में वृद्धि: जमीनों की बिक्री और नए प्रोजेक्ट्स से सरकार के खजाने में रेवेन्यू आएगा।
- डेवलपमेंट: इंडस्ट्रियल एरिया में सालों से खाली पड़े खंडहरनुमा प्लॉट्स अब आधुनिक प्रोजेक्ट्स में तब्दील होंगे।