रसोई में स्कूल और कबाड़ में बचपन! मीडिया अभियान के बाद जागी सरकार, पारवा में बिना मान्यता वाला स्कूल सीज

Desk

प्रदेश के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले फर्जी स्कूलों के खिलाफ मीडिया द्वारा छेड़ी गई जंग अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। जनवरी 2026 में हमारी टीम ने एक बड़ा खुलासा करते हुए बताया था कि प्रदेश में 2500 से ज्यादा निजी स्कूल बिना किसी सरकारी मान्यता के धड़ल्ले से चल रहे हैं। आज उसी खुलासे का असर धरातल पर दिखने लगा है। शिक्षा विभाग की टीम ने बीकानेर के नोखा (पारवा) में चल रहे एक ऐसे ही ‘फर्जीवाड़े की पाठशाला’ का भणाडाफोड़ किया है, जिसने प्रशासन की नींद उड़ा दी है।

दो कमरे, एक रसोई और 100 मासूमों का भविष्य

जांच में सामने आया कि पीएस मेमोरियल स्कूल नाम का यह संस्थान बिना किसी मान्यता के महज 25×20 फीट के एक मकान में चल रहा था। स्कूल के दो कमरों और यहाँ तक कि रसोई घर में 100 से ज्यादा बच्चे ठूस-ठूस कर बिठाए गए थे। रसोई में चूल्हा और चिमनी तक मौजूद थी, जो मासूमों की सुरक्षा के साथ बड़ा खिलवाड़ था। इस ‘कागजी खेल’ के नाम पर गरीब अभिभावकों से हर महीने 500 से 800 रुपये की अवैध वसूली की जा रही थी।

मार्केट में बिक रही थी दूसरे स्कूल की मार्कशीट

यह सिर्फ एक स्कूल नहीं, बल्कि संगठित ठगी का केंद्र था। संचालक ने नामदेव शिक्षण संस्थान के साथ सांठगांठ कर रखी थी। पढ़ाया पीएस मेमोरियल में जाता था, लेकिन मार्कशीट और टीसी (TC) नामदेव स्कूल की थमा दी जाती थी। विभाग अब नामदेव शिक्षण संस्थान की मान्यता रद्द करने की भी तैयारी कर रहा है।

छापेमारी के दौरान यह भी पाया गया कि बच्चों को लाने-ले जाने के लिए एक कबाड़ हो चुकी बोलेरो का उपयोग किया जा रहा था, जिसके पास न तो फिटनेस सर्टिफिकेट था और न ही बाल वाहिनी का परमिट। क्षमता से अधिक बच्चों को गाड़ी में भरकर उनकी जान जोखिम में डाली जा रही थी।

“हमने जनवरी में ही आगाह किया था कि प्रदेश में शिक्षा माफिया सक्रिय है। पारवा की यह घटना सिर्फ एक बानगी है। हमारी मुहिम तब तक जारी रहेगी जब तक प्रदेश का हर बच्चा एक सुरक्षित और मान्यता प्राप्त स्कूल में न पहुंच जाए।”

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