आवासन मंडल की बड़ी जीत, 2200 करोड़ की जमीन पर हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

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राजधानी के बी टू (B2) बाईपास चौराहा स्थित बेशकीमती जमीन को लेकर पिछले तीन दशकों से चल रही कानूनी जंग आखिरकार अपने अंजाम तक पहुँच गई है। राजस्थान हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में श्रीराम कॉलोनी की करीब 42 बीघा 10 बिस्वा भूमि पर राजस्थान आवासन मंडल (RHB) के स्वामित्व को सही ठहराया है। मंडल अधिकारियों के अनुसार, इस जमीन का वर्तमान बाजार मूल्य ₹2200 करोड़ से भी अधिक आंका जा रहा है।

हाईकोर्ट का कड़ा रुख: ‘गलत तथ्यों पर मिला आदेश अवैध’

न्यायाधीश गणेश राम मीणा ने आवासन मंडल की याचिका को स्वीकार करते हुए निजी पक्षकारों की तीन याचिकाओं को खारिज कर दिया। कोर्ट ने अपने फैसले में कई महत्वपूर्ण टिप्पणियां कीं:

  • 2002 का आदेश रद्द: कोर्ट ने 12 फरवरी 2002 को गलत तथ्यों के आधार पर जारी पिछले आदेश को सिरे से खारिज कर दिया।
  • स्वामित्व पर स्पष्टता: अदालत ने साफ कहा कि केवल ‘विक्रय करार’ (Sale Agreement) से मालिकाना हक हस्तांतरित नहीं होता।
  • नियमन अवैध: जेडीए द्वारा 29 मई 1995 को जारी योजना स्वीकृति और 1981 के विक्रय करार को अवैध मानते हुए शून्य घोषित कर दिया गया है।

विवाद की जड़: 1981 से 2026 तक का सफर

यह पूरा मामला जवाहरपुरी भवन निर्माण सहकारी समिति से शुरू हुआ था, जिसने 1981 में विक्रय समझौते के आधार पर श्रीराम कॉलोनी-बी योजना विकसित करने का दावा किया था।

  • अधिग्रहण: वर्ष 1989 में आवासन मंडल ने भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की, जो 4 जनवरी 1991 को पूरी हुई।
  • फर्जीवाड़ा: वर्ष 2019 की जांच रिपोर्ट में सामने आया कि अधिग्रहण से पहले वहां कोई योजना अस्तित्व में ही नहीं थी।
  • NOC से इनकार: तत्कालीन आवासन मंडल आयुक्त पवन अरोड़ा ने 2019 में जेडीए को एनओसी देने से साफ इनकार कर दिया था, जिसके बाद सोसाइटी के खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज की गई थी।

अब क्या करेगा आवासन मंडल?

विवादित भूमि पर फिलहाल केवल बाउंड्रीवाल और कुछ कच्चे कमरे बने हुए हैं। हाईकोर्ट से हरी झंडी मिलने के बाद मंडल ने अपनी रणनीति तैयार कर ली है:

  1. कब्जा और बोर्ड: जमीन पर कब्जा लेकर तुरंत हाउसिंग बोर्ड की संपत्ति होने के बोर्ड लगाए जाएंगे।
  2. सुरक्षा: पूरी जमीन की तारबंदी और बाउंड्रीवाल की जाएगी।
  3. अतिक्रमण हटाना: पुलिस के सहयोग से मौके पर बने अवैध टीन शेड और बाउंड्रीवाल को ध्वस्त किया जाएगा।
  4. कानूनी कवच: मंडल जल्द ही इस मामले में ‘कैवियट’ (Caveat) लगाने जा रहा है ताकि आगे की कार्रवाई में कोई रुकावट न आए।

आवासन मंडल आयुक्त अरविंद पोसवाल ने कहा कि फैसले का अध्ययन करवाया जा रहा है और उसी के आधार पर जल्द ही धरातल पर कार्रवाई शुरू की जाएगी।

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