शिक्षा व्यवस्था को अनुशासन और संस्कार से जोड़ने की दिशा में राज्य सरकार अब दो बड़े मोर्चों पर एक साथ काम करने जा रही है। एक तरफ जहां बच्चों को ‘निरर्थक’ नामों से मुक्ति दिलाने की पहल की गई है, वहीं दूसरी ओर स्कूलों में नशा करने वाले शिक्षकों पर सख्ती की तैयारी शुरू हो गई है।
नाम बदलने का मिलेगा मौका
शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने प्रेस वार्ता में कहा कि विभाग ऐसे बच्चों को अपने नाम और उपनाम बदलने का अवसर देगा, जिनके नाम अर्थहीन या मजाक का कारण बनते हैं। मंत्री ने माना कि कई बार अभिभावक अनजाने में बच्चों के ऐसे नाम रख देते हैं, जो बड़े होने पर परेशानी और उपहास का कारण बनते हैं। मंत्री ने कहा, “हम चाहते हैं कि बच्चों का नाम उनकी पहचान बने, मजाक नहीं।” ऐसे बच्चों को अब सार्थक नाम चुनने का अवसर दिया जाएगा। यह पहल खास तौर पर उन विद्यार्थियों के लिए राहत लेकर आएगी, जो वर्षों से अपने नाम को लेकर असहज महसूस करते रहे हैं। इसके लिए विभाग खुद करीब दो हजार नामों की सूची तैयार करेगा, जो प्रवेश के समय अभिभावकों को विकल्प के तौर पर दिए जाएंगे।
नशे में स्कूल आने वाले शिक्षक अब रडार पर
सरकार ने शिक्षा के माहौल को बेहतर बनाने के लिए दूसरा बड़ा कदम उठाया है। अब धूम्रपान, गुटखा, तंबाकू या शराब का सेवन करने वाले शिक्षकों की सूची तैयार की जाएगी। मंत्री ने साफ कहा कि कुछ शिक्षक शराब पीकर स्कूल आते हैं या लगातार गुटखा-तंबाकू खाते रहते हैं। इसका सीधा असर बच्चों पर पड़ता है, जो स्वीकार्य नहीं है। सभी जिलों के अधिकारियों को ऐसे शिक्षकों की पहचान कर जल्द से जल्द रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए गए हैं।
शिक्षा अधिकारियों को अन्य महत्वपूर्ण निर्देश: शिक्षा मंत्री ने विभाग की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निम्नलिखित दिशा-निर्देश भी दिए:
- छात्रों का सम्मान: सरकारी स्कूलों में टॉप आने वाले विद्यार्थियों का विशेष सम्मान किया जाएगा।
- प्रेरणा के लिए होर्डिंग: मेधावी बच्चों के फोटो और होर्डिंग स्कूल प्रशासन की ओर से लगाए जाएंगे, जिससे अन्य बच्चे भी प्रेरित हों।
- पूर्व छात्र सम्मेलन: स्कूलों में पूर्व छात्रों के सम्मान समारोह आयोजित किए जाएंगे ताकि पुराने विद्यार्थियों का अपनी संस्था से जुड़ाव बना रहे।
- घुमंतू जातियों के लिए शिक्षा: घुमंतू जातियों के बच्चों को अनिवार्य रूप से प्रवेश दिया जाएगा।
- प्रवेश में छूट: किसी भी बच्चे का प्रवेश केवल दस्तावेज की कमी के कारण नहीं रोका जाएगा।
इन फैसलों से राजस्थान के शिक्षा जगत में बड़े बदलाव की उम्मीद जताई जा रही है, जिससे स्कूलों में अनुशासन के साथ-साथ गुणवत्तापूर्ण वातावरण तैयार हो सकेगा।
प्रशासनिक संदेश: शिक्षा केवल किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि एक बेहतर व्यक्तित्व निर्माण की प्रक्रिया है। अनुशासन ही सफलता की पहली सीढ़ी है।