सूरतगढ़ एसडीएम कार्यालय का बाबू रिश्वत के जाल में फंसा, हर महीने मांग रहा था 3000 रुपये

राजस्थान में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए सूरतगढ़ के उपखंड अधिकारी (एसडीएम) कार्यालय के एक वरिष्ठ सहायक के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया है । आरोपी बाबू ने एक होमगार्ड से उसका मासिक वेतन बिल पास करने की एवज में हर महीने 3000 रुपये की रिश्वत मांगी थी । शिकायत का सत्यापन होने के बाद जयपुर एसीबी (क्राइम ब्रांच) ने 23 मार्च 2026 को यह एफआईआर (नंबर 0077) दर्ज की है

वेतन पास करने के लिए मांगी घूस

परिवादी दीपक गौड़, जो राजस्थान गृह रक्षा विभाग में होमगार्ड के पद पर कार्यरत हैं, ने 29 अक्टूबर 2025 को एसीबी में अपनी शिकायत दर्ज करवाई थी । दीपक मार्च 2025 से सूरतगढ़ एसडीएम कार्यालय में ड्यूटी कर रहे हैं । उनकी शिकायत के अनुसार, एसडीएम कार्यालय का वरिष्ठ सहायक रणवीर गोदारा उनका वेतन बिल प्रमाणित करवाकर ट्रेजरी भेजने का काम देखता है । रणवीर गोदारा ने उनका सितंबर 2025 का बिल पास करने की एवज में 3000 रुपये रिश्वत की मांग की और दबाव बनाया कि वह हर महीने उसे 3000 रुपये दे । आरोपी ने रिश्वत न देने पर वेतन रोकने और एसडीएम कार्यालय से ड्यूटी हटवाने की धमकी भी दी थी ।

सत्यापन में लिए 2000 रुपये, ट्रैप के समय हुआ शक

एसीबी ने शिकायत मिलने के बाद 30 अक्टूबर 2025 को कांस्टेबल रामजस के जरिए इस रिश्वत की मांग का गोपनीय सत्यापन करवाया । डिजिटल वॉयस रिकॉर्डर के साथ किए गए इस सत्यापन के दौरान आरोपी रणवीर गोदारा ने 2000 रुपये मौके पर ले लिए और बाकी बचे 1000 रुपये अगले महीने की राशि के साथ मांगे । इसके बाद 12 और 13 नवंबर 2025 को एसीबी ने ट्रैप (रंगे हाथों पकड़ने) की योजना बनाई । लेकिन आरोपी को एसीबी की भनक लग गई और उसने परिवादी से बात करना बंद कर दिया, जिसके कारण वह रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों नहीं पकड़ा जा सका ।

ऑडियो सबूत के आधार पर एफआईआर दर्ज

ट्रैप की कार्रवाई पूरी न होने पर परिवादी दीपक गौड़ ने 5 दिसंबर 2025 को अपनी 4000 रुपये की ट्रैप राशि वापस लेने और मामले में नियमानुसार कानूनी कार्रवाई करने का निवेदन किया । भले ही ट्रैप सफल नहीं हुआ, लेकिन सत्यापन के दौरान रिश्वत मांगने के स्पष्ट सबूत और ऑडियो रिकॉर्डिंग मिलने के आधार पर एसीबी ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित 2018) की धारा 7 के तहत मामला दर्ज कर लिया है । इस मामले की आगे की जांच एसीबी श्रीगंगानगर-प्रथम के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पवन कुमार मीणा को सौंपी गई है ।

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