राजस्थान के बहुचर्चित जल जीवन मिशन (JJM) में भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं, इसका एक और काला अध्याय सामने आया है। प्राप्त एक्सक्लूसिव दस्तावेज़ों से पता चला है कि मालपुरा, टोडारायसिंह और पीपलू क्षेत्र की 275 करोड़ रुपये की पेयजल परियोजना में 50 करोड़ रुपये से ज्यादा के घोटाले की बिसात बिछाई जा चुकी है। यह क्षेत्र पीएचईडी (PHED) मंत्री कन्हैयालाल चौधरी के अधिकार क्षेत्र में आता है। इस पूरे खेल में विभाग के रसूखदार इंजीनियरों और हैदराबाद की एक चहेती कंपनी के बीच ‘नापाक गठबंधन’ के गंभीर आरोप लगे हैं।
हैदराबाद की फर्म पर मेहरबानी और पूलिंग का खेल दस्तावेजों के मुताबिक, निविदा संख्या 17/2025-26 को लेकर आरोप है कि विभाग के आला अधिकारियों ने हैदराबाद की फर्म मैसर्स भूरतनम कन्स्ट्रक्शन कं. (M/s Bhoorathnom Construction Co.) को फायदा पहुँचाने के लिए सभी नियमों को ताक पर रख दिया है।
- पूलिंग का आरोप: इस निविदा में कथित तौर पर केवल 3 फर्मों—भूरतनम कन्स्ट्रक्शन (L-1), मैसर्स जुबेरी इंजीनियरिंग और LCC प्रोजेक्ट्स—को ही शामिल होने दिया गया, ताकि प्रतिस्पर्धा खत्म कर दी जाए। मैसर्स जुबेरी और LCC प्रोजेक्ट्स से केवल ‘सपोर्ट’ में टेंडर डलवाए गए हैं।
- अधिकारी की संदिग्ध भूमिका: अधीक्षण अभियंता श्री रामचन्द्र राड (जिनके पास अतिरिक्त मुख्य अभियंता, अजमेर का चार्ज भी है) पर आरोप है कि उन्होंने दूसरी कंपनियों को डरा-धमका कर निविदा से दूर रखा।
- नियमों की अनदेखी: नियमानुसार 100 करोड़ से ऊपर के टेंडर स्पेशल प्रोजेक्ट कार्यालय से होने चाहिए, लेकिन इसे ‘मैनेज’ करने के लिए जानबूझकर अजमेर रीजन से करवाया जा रहा है। पिछले 2 साल में यह टेंडर तीसरी बार निकाला गया है; पहली दो बार ‘सेटिंग’ न बैठने पर निविदाएं निरस्त कर दी गई थीं।
पुरानी जांच कमेटी का दागी सच और नई कमेटी पर संदेह मामला मीडिया में आने के बाद विभाग ने आनन-फानन में सीई प्रशासन दिनेश गोयल की अध्यक्षता में जांच कमेटी बनाई थी। शिकायतकर्ता ने पहले ही अंदेशा जताया था कि यह कमेटी क्लीनचिट देगी। हुआ भी यही, जांच कमेटी ने सभी आरोपों को निराधार बताकर क्लीनचिट दे दी। इसके ईनाम के तौर पर दिनेश गोयल को मुख्य अभियंता (प्रोजेक्ट उदयपुर) का अतिरिक्त चार्ज दिया गया। लेकिन 17 फरवरी को भ्रष्टाचार के एक अन्य मामले में दिनेश गोयल को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।
अब इस महाघोटाले को दबाने के लिए जोधपुर के मुख्य अभियंता श्री देवराज सोलंकी की अध्यक्षता में एक नई टीम का गठन किया गया है। सूत्रों का दावा है कि सचिवालय स्तर से भारी दबाव बनाया जा रहा है कि निविदा की वित्तीय बिड को जल्द से जल्द हरी झंडी दी जाए। रामचन्द्र राड को पीएचईडी मंत्री का बेहद करीबी माना जाता है, जिससे नई जांच कमेटी की निष्पक्षता पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
ACB की एंट्री से मची खलबली
50 करोड़ की इस सौदेबाजी पर अब भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की नज़र पड़ गई है। ACB ने इस मामले में परिवाद संख्या C-HA-676/26 दर्ज कर ली है और ब्यूरो अब जांच कर रहा है कि क्या टेंडर की प्रक्रिया को वाकई ‘पूलिंग’ के जरिए दूषित किया गया है। शिकायतकर्ता ने स्पष्ट रूप से कहा है, “अगर यह कंपनी L-1 आती है, तो मेरी शिकायत पूरी तरह प्रमाणित हो जाएगी कि यह टेंडर पहले ही ‘फिक्स’ था।”
