जयपुर डिस्कॉम में करोड़ों का टेंडर घोटाला: पूर्व MD सहित कई बड़े अधिकारियों पर ACB का शिकंजा, करोड़ों के वित्तीय नुकसान का खुलासा

जयपुर। राजस्थान भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने जयपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (JVVNL) में हुए एक बड़े टेंडर घोटाले का भंडाफोड़ किया है। ब्यूरो ने निगम के पूर्व प्रबन्ध निदेशक (MD) रामनिवास कुमावत (आर.एन. कुमावत), तत्कालीन अतिरिक्त मुख्य अभियन्ता अनिल गुप्ता और अन्य उच्चाधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार और आपराधिक षडयंत्र का मामला दर्ज किया है । इन अधिकारियों पर नियमों को ताक पर रखकर निजी फर्मों को फायदा पहुँचाने और सरकार को करोड़ों रुपये की आर्थिक हानि पहुँचाने का गंभीर आरोप है ।

मामला 1: फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र और करोड़ों की अमानत राशि लौटाने का खेल

जांच में सामने आया कि JVVNL द्वारा 21 अक्टूबर 2022 को टोंक और बून्दी जिलों में बिजली वितरण बुनियादी ढांचे के लिए टेंडर संख्या 534 और 535 आमंत्रित किए गए थे । इस प्रक्रिया में मैसर्स एबी इन्टरप्राईजेज लि. ने भाग लिया और फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र प्रस्तुत किए

जब विभाग ने TCIL दिल्ली से इन दस्तावेजों की जांच करवाई, तो खुलासा हुआ कि कंपनी द्वारा पेश कार्यादेश और अनुभव प्रमाण पत्र कभी जारी ही नहीं किए गए थे, यानी वे पूरी तरह फर्जी थे । नियमों (RTPP Act) के अनुसार, ऐसी स्थिति में कंपनी की 3.37 करोड़ रुपये की धरोहर राशि (EMD) जब्त की जानी चाहिए थी और कंपनी को 3 साल के लिए ब्लैकलिस्ट किया जाना चाहिए था । लेकिन MD आर.एन. कुमावत की अध्यक्षता वाली कमेटी ने कंपनी से मिलीभगत कर उसकी धरोहर राशि को चुपचाप लौटा दिया, जिससे सरकार को सीधा नुकसान हुआ

मामला 2: सिंगल बिडर को फायदा और 237 करोड़ का अतिरिक्त भुगतान

दूसरा गंभीर मामला टेंडर संख्या 545 और 546 से जुड़ा है, जो प्रदेश के विभिन्न जिलों (अलवर, भरतपुर, जयपुर, टोंक आदि) में 33/11 KV के नए सब-स्टेशन (GSS) बनाने के लिए थे । इस टेंडर में केवल एक ही फर्म मैसर्स आरसी एन्टरप्राईजेज ने भाग लिया

आरोप है कि तत्कालीन MD और अन्य अधिकारियों ने आपराधिक षडयंत्र रचते हुए फर्म के अनुकूल शर्तों में बदलाव किए । जांच रिपोर्ट और एजी ऑडिट (AG Audit) के अनुसार, इस फर्म को प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत से कई गुना अधिक मूल्य पर कार्यादेश दिए गए । इससे सरकार को लगभग 237.27 करोड़ रुपये का अतिरिक्त व्यय करना पड़ा । बाद में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की पुष्टि होने पर इस फर्म के कार्यादेश निरस्त कर दिए गए और उसे 3 साल के लिए डिबार (Debar) कर दिया गया

ACB की कार्रवाई और धाराएं

ब्यूरो की प्राथमिक जांच संख्या 21/2025 में आरोपों की पुष्टि होने के बाद, एसीबी ने 18 मार्च 2026 को औपचारिक एफ़आईआर दर्ज की है । मुख्य आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7(c), 13(1)(a), 13(2) और भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 120-B (आपराधिक षडयंत्र) के तहत मामला दर्ज किया गया है । इस पूरे प्रकरण की अग्रिम जांच एसीबी के उप अधीक्षक पुलिस अभिषेक पारीक को सौंपी गई है

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