ब्यावर। राजस्थान भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की राजसमन्द टीम ने ब्यावर जिले के रायपुर में एक बड़ी कार्रवाई करते हुए पंचायत समिति के सहायक अभियंता (AEN) को रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। इसके साथ ही, आंगनबाड़ी केंद्रों के बिल पास करने के बदले घूस मांगने वाले सीडीपीओ (CDPO) के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है।
MB भरने और बिल पास करने के बदले मांगी घूस
परिवादी मुकेश मजुमदार, जो ‘विनायक एंटरप्राइजेज’ के मालिक हैं, ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उनकी फर्म ने रायपुर और बदनोर ब्लॉक में 11 आंगनबाड़ी केंद्रों के नवीनीकरण का ठेका लिया था। बदनोर ब्लॉक के बिलों के भुगतान और रायपुर ब्लॉक के लंबित बिलों को पास करने के बदले सीडीपीओ मनीष मीणा ने 1,80,000 रुपये की मांग की थी। वहीं, रायपुर पंचायत समिति के एईएन प्रदीप कुमार ने इन कार्यों की माप पुस्तिका (MB) भरने की एवज में 21,000 रुपये की अलग से मांग की थी।
सरकारी क्वार्टर पर बिछाया गया जाल
एसीबी ने शिकायत का सत्यापन करने के बाद 16 मार्च 2026 को जाल बिछाया। एईएन प्रदीप कुमार ने परिवादी को रिश्वत की राशि देने के लिए पंचायत समिति परिसर स्थित अपने सरकारी क्वार्टर (नंबर 08) पर बुलाया। जैसे ही परिवादी ने उसे 15,000 रुपये थमाए, एसीबी टीम ने उसे दबोच लिया। रिश्वत की राशि आरोपी की पैंट की पिछली जेब से बरामद की गई।
आवास से मिले 5.23 लाख और सीडीपीओ पर कार्रवाई
गिरफ्तारी के बाद जब एईएन के आवास की तलाशी ली गई, तो वहां 5,23,000 रुपये की संदिग्ध नकदी बरामद हुई, जिसका आरोपी कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सका। मामले के दूसरे आरोपी सीडीपीओ मनीष मीणा को एसीबी की भनक लग गई थी, जिसके कारण उसने परिवादी का नंबर ब्लॉक कर दिया था, लेकिन सत्यापन के आधार पर उसके विरुद्ध भी भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत मामला दर्ज किया गया है।
