उदयपुर में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने एक सनसनीखेज कार्यवाही करते हुए पुलिस की एक ‘स्पेशल टीम’ के अवैध वसूली नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है । खुद को एक बड़े अधिकारी की विशेष टीम बताकर एक गैराज मालिक को झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकी देने वाले कांस्टेबल को 20 हजार रुपये की रिश्वत के साथ गिरफ्तार किया गया है । यह पूरी साजिश एकलिंगपुरा में ‘R.K. कार केयर’ नाम से गैराज चलाने वाले महेंद्र डांगी को डरा-धमकाकर उससे हर महीने मोटी रकम वसूलने के लिए रची गई थी ।
डिप्टी की स्पेशल टीम और 50 हजार की ‘मंथली’ डिमांड
महेंद्र डांगी ने एसीबी को दी शिकायत में बताया कि करीब 4-5 दिन पहले सादा वर्दी में कुछ पुलिसकर्मी सरकारी बोलेरो (RJ-27-UC-2212) लेकर उनके गैराज पर आए थे । टीम में शामिल कांस्टेबल नागेंद्र सिंह और अर्जुन सिंह ने खुद को डिप्टी साहब की स्पेशल टीम का सदस्य बताया और गैराज की तलाशी लेना शुरू कर दिया । उन्होंने महेंद्र पर चोरी की गाड़ियां काटने और नाबालिगों से काम करवाने जैसे गंभीर आरोप लगाते हुए गैराज सीज करने की धमकी दी । इस कथित कार्यवाही से बचने के लिए शुरू में 50 हजार रुपये प्रति माह की ‘मंथली’ मांगी गई, जो बाद में हाथ-जोड़ी करने पर 25 हजार रुपये महीना तय हुई ।
मोबाइल दुकान में बिछाया गया सस्पेंस से भरा जाल
महेंद्र डांगी भ्रष्ट पुलिसवालों के आगे झुकना नहीं चाहते थे, इसलिए उन्होंने एसीबी स्पेशल यूनिट उदयपुर में शिकायत दर्ज कराई । 11 मार्च 2026 को एसीबी ने एक जाल बिछाया । कांस्टेबल नागेंद्र सिंह ने रिश्वत की पहली किस्त लेने के लिए महेंद्र को परशुराम चौराहा स्थित ‘सिया मोबाइल’ नाम की दुकान पर बुलाया । शातिर कांस्टेबल ने रिश्वत के पैसे सीधे अपने हाथ में नहीं लिए । उसने महेंद्र को दुकान के अंदर बने एक केबिन में ले जाकर 20 हजार रुपये वहां रखी टेबल पर रखवा दिए । इसके बाद उसने दुकान के संचालक प्रफुल मेनारिया से झूठ बोला कि वह टेबलेट खरीदने के लिए 20 हजार रुपये लाया था, जो केबिन की टेबल पर छूट गए हैं, उन्हें उठाकर रख लो ।
कांस्टेबल गिरफ्तार, ASI समेत तीन आरोपी अब भी रूहपोश
जैसे ही दुकानदार ने वे पैसे उठाकर अपनी जेब में रखे, एसीबी की टीम ने दबिश दे दी । रासायनिक घोल से दुकानदार के हाथों और जेब की धुलाई की गई, तो वह गुलाबी हो गया, जिससे रिश्वत के नोटों की पुष्टि हो गई । एसीबी ने कांस्टेबल नागेंद्र सिंह राणावत (बेल्ट नंबर 1186) को गिरफ्तार कर लिया है । हालांकि, इस साजिश में शामिल अन्य तीन आरोपी—सहायक उप निरीक्षक (ASI) शक्ति सिंह, हेड कांस्टेबल अर्जुन सिंह और कांस्टेबल अनिल मीणा—कार्यवाही की भनक लगते ही फरार हो गए । एसीबी ने आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है ।
