अलवर: राजीनामे के बदले रिश्वत का खेल; ACB ने कांस्टेबल को 10 हजार की घूस लेते दबोचा, हेड कांस्टेबल फरार

अलवर। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की दौसा टीम ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए अलवर जिले के टहला थाने की ‘गोला का बास’ पुलिस चौकी पर तैनात एक कांस्टेबल को 10,000 रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया है । यह रिश्वत एक पुराने मुकदमे में राजीनामा फाइल पर लेने की एवज में मांगी गई थी ।

राजीनामा स्वीकार करने के लिए मांगी घूस

परिवादी नरसीराम मीणा ने एसीबी चौकी दौसा में शिकायत दर्ज कराई थी कि उसके माता-पिता और भाई के खिलाफ टहला थाने में दर्ज एक मुकदमे (संख्या 40/2026) में आपसी राजीनामा हो गया था । जब वह इस राजीनामे को पेश करने जांच अधिकारी हेड कांस्टेबल रामनारायण के पास गया, तो उन्होंने 20,000 रुपये की मांग की और कहा कि यह राशि कांस्टेबल रामप्रकाश को दे देना, तभी काम होगा

गेस्ट हाउस पर बिछाया गया जाल

एसीबी ने शिकायत का सत्यापन 6 मार्च 2026 को करवाया, जिसमें रिश्वत की मांग की पुष्टि हुई । आरोपी 15,000 रुपये लेने पर सहमत हुए थे, जिसमें से 5,000 रुपये सत्यापन के दौरान ही ले लिए गए । शेष 10,000 रुपये के लिए 11 मार्च 2026 को जाल बिछाया गया । कांस्टेबल रामप्रकाश रिश्वत की राशि लेने के लिए परिवादी के होटल ‘भावना गेस्ट हाउस’ (गोला का बास) पहुँचा

रंगे हाथों गिरफ्तारी और रसायनिक परीक्षण

जैसे ही कांस्टेबल रामप्रकाश ने 10,000 रुपये की रिश्वत लेकर अपनी पेंट की जेब में रखी, एसीबी टीम ने उसे दबोच लिया । रसायनिक परीक्षण (सोडियम कार्बोनेट घोल) के दौरान आरोपी के दोनों हाथों और पेंट की जेब का रंग गुलाबी पाया गया, जो रिश्वत लेने का वैज्ञानिक प्रमाण है । पूछताछ में कांस्टेबल ने स्वीकार किया कि उसने यह राशि हेड कांस्टेबल रामनारायण के कहने पर ली थी

हेड कांस्टेबल फरार, कानूनी कार्रवाई जारी

कार्रवाई की भनक लगते ही मुख्य आरोपी हेड कांस्टेबल रामनारायण मौके से फरार हो गया, जिसकी तलाश जारी है । एसीबी ने दोनों आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित 2018) की धारा 7 और 12 के तहत मामला दर्ज किया है । इस प्रकरण की अग्रिम जांच एसीबी अलवर-प्रथम के उप अधीक्षक शब्बीर अहमद को सौंपी गई है

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