जयपुर: शहर में यूडी टैक्स (UD Tax) वसूली को लेकर झोटवाड़ा इंडस्ट्रियल एरिया (Jhotwara Industrial Area) में भारी विवाद खड़ा हो गया है। इस मुद्दे पर नगर निगम और फैक्ट्री मालिक अब पूरी तरह से आमने-सामने आ गए हैं। विवाद की शुरुआत विद्याधर नगर जोन की ओर से बीते एक सप्ताह में करीब 10 से 12 फैक्ट्रियों को भेजे गए टैक्स नोटिस के बाद हुई है।
विवाद की जड़: किसका क्या है दावा?
- नगर निगम का तर्क (गतिविधियां जारी हैं): निगम का स्पष्ट कहना है कि केवल फैक्ट्री या प्रोडक्शन यूनिट होने पर यूडी टैक्स नहीं लिया जाता। विद्याधर नगर जोन के राजस्व अधिकारी सरोज पारीक के अनुसार, “जहां फैक्ट्री के अलावा वेयरहाउस, कोल्ड स्टोरेज, आवासीय या अन्य व्यावसायिक गतिविधियां चल रही हैं, वहां यूडी टैक्स लागू होता है। इसी आधार पर झोटवाड़ा इंडस्ट्रियल एरिया में नोटिस जारी किए गए हैं।”
- फैक्ट्री मालिकों का पलटवार (बिना जांच नोटिस): दूसरी ओर, फैक्ट्री मालिकों का आरोप है कि उनकी यूनिट्स में केवल उत्पादन (Production) कार्य हो रहा है, इसके बावजूद उन्हें बिना किसी वास्तविक जांच के नोटिस थमाए जा रहे हैं। झोटवाड़ा एसोसिएशन के अध्यक्ष आनंद ने बताया कि निगम क्षेत्र में कोई मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं करवा रहा है, फिर भी लाखों रुपए के टैक्स नोटिस भेजे जा रहे हैं। उनका यह भी तर्क है कि RIICO एरिया में जमीन आवंटन के बाद वे टैक्स, लीज राशि और अन्य शुल्क पहले से ही RIICO को जमा कराते हैं।
18 साल का हिसाब, 2 लाख तक की वसूली यह मामला सिर्फ नोटिस भेजने तक सीमित नहीं है, बल्कि वसूली की राशि और समयावधि को लेकर भी बड़ा विवाद है।
- विद्याधर नगर जोन ने साल 2007 से लेकर 2025 तक (18 साल) का बकाया यूडी टैक्स जोड़कर ये नोटिस जारी किए हैं।
- फैक्ट्री मालिकों के अनुसार, 164 से 174 यूनिट्स को नोटिस दिए गए हैं।
- निगम ने 18 साल की गणना के आधार पर प्रति यूनिट 1.5 लाख से 2 लाख रुपए तक की भारी-भरकम वसूली के नोटिस थमा दिए हैं, जिससे उद्यमियों में भारी रोष है।
