जयपुर नगर निगम की मनमानी: यूडी टैक्स वसूली के नाम पर बिना आधार थमाए जा रहे नोटिस, आमजन में दहशत

जयपुर। राजधानी में नगर निगम की ओर से यूडी टैक्स वसूली को लेकर आम लोगों में दहशत का माहौल है। आरोप है कि निगम अधिकारी पारदर्शिता और नियमों की अनदेखी कर केवल वसूली के नाम पर मनमानी कार्रवाई कर रहे हैं।

बिना बताए चस्पा हो रहे नोटिस, न क्षेत्रफल सही न गणना निगम अधिकारी बिना किसी पूर्व सूचना के सीधे मकानों पर नोटिस चस्पा कर रहे हैं। सबसे बड़ी हैरानी की बात यह है कि इन नोटिसों में न तो संपत्ति का सही क्षेत्रफल दर्शाया जा रहा है और न ही टैक्स की कोई स्पष्ट गणना दी जा रही है।

कृषि भूमि पर 15-18 साल का बकाया, दोगुना जुर्माना वसूली के नाम पर दादागिरी इस कदर हावी है कि कई मकान मालिकों को 15 से 18 साल पुराना यूडी टैक्स बकाया निकालकर भारी-भरकम रकम थमा दी गई है, जबकि उस समय जमीन पर कृषि कार्य हो रहा था। इतना ही नहीं:

  • पहले कम राशि का नोटिस जारी किया जाता है और कुछ ही महीने बाद उसी संपत्ति पर दोगुनी रकम का नया नोटिस थमा दिया जाता है।
  • जो लोग यूडी टैक्स के दायरे में ही नहीं आते, उन्हें भी नोटिस जारी कर दिए गए हैं।
  • तय समय पर टैक्स जमा नहीं कराने पर सीधे मकानों को सील करने की कार्रवाई की जा रही है।

ग्राउंड जीरो की हकीकत (दो प्रमुख मामले):

  • केस-1 (कृषि भूमि पर 27 लाख बकाया): मुरलीपुरा जोन में साधुराम गुर्जर को फरवरी में 14 लाख रुपए का नोटिस दिया गया। भुगतान नहीं करने पर 12 मार्च को नया नोटिस (सर्विस क्रमांक 25585620) जारी कर बकाया राशि सीधे 27 लाख रुपए कर दी गई। 2007 से बकाया बताया गया है, जबकि 2022 तक यह जमीन कृषि उपयोग में थी।
  • केस-2 (नर्सरी सील, 30 हजार पौधे सूखने के कगार पर): जगतपुरा और झालाना जोन के अधिकारियों ने सिद्धार्थ नगर स्थित एक नर्सरी पर 18 लाख रुपए का बकाया निकालते हुए जमीन को सील कर दिया। नर्सरी संचालक के अनुसार, अंदर करीब 30 हजार पौधे लगे हैं, जिन्हें चार दिन से पानी नहीं मिल पा रहा है और वे सूखने के कगार पर हैं।

UDH मंत्री की फटकार भी बेअसर लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों ने निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिकायतों के बावजूद अधिकारियों द्वारा कोई सुनवाई नहीं की जा रही है। यह स्थिति तब बनी हुई है, जब यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा स्वयं अवैध नोटिसों पर अधिकारियों को फटकार लगा चुके हैं।

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