जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने वाहन मालिकों की जिम्मेदारी को लेकर एक अत्यंत महत्वपूर्ण कानूनी फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी वाहन का रजिस्ट्रेशन परिवहन विभाग के रिकॉर्ड में पुराने मालिक के नाम दर्ज है, तो सड़क दुर्घटना की स्थिति में वह मुआवजे (Claim) की जिम्मेदारी से बच नहीं सकता। भले ही वह वाहन नीलामी (Auction) या किसी निजी सौदे के जरिए किसी अन्य व्यक्ति को बेच दिया गया हो।
उदयपुर के तत्कालीन एसपी की जीप का मामला
यह मामला उदयपुर के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक (SP) के नाम दर्ज एक सरकारी जीप से जुड़ा है। जस्टिस अनूप कुमार ढंड ने यह आदेश प्रहलाद कुमार चौधरी की अपील पर सुनवाई करते हुए दिया। परिवहन विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार, हादसे के समय और उसके बाद भी वाहन का रजिस्ट्रेशन उदयपुर के तत्कालीन एसपी के नाम ही दर्ज था। ऐसे में अदालत ने उन्हें प्रार्थी को क्लेम देने के लिए जवाबदेह माना है।
क्लेम राशि में की गई बढ़ोतरी
हाईकोर्ट ने मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (MACT) द्वारा तय की गई क्लेम राशि को 6,52,767 रुपये से बढ़ाकर 7,75,178 रुपये कर दिया है। अदालत ने माना कि अधिकरण ने प्रार्थी की मासिक आय की गणना 26 कार्य दिवसों के आधार पर की थी, जबकि इसे पूरे 30 दिनों के आधार पर आंका जाना चाहिए था।
MACT कोर्ट के फैसले को पलटा
हादसा 24 मार्च 2016 को जयपुर के बस्सी क्षेत्र में हुआ था, जहाँ तेज गति से आ रही जीप ने एक बाइक को टक्कर मार दी थी। इस हादसे में बाइक सवार को शरीर के 30 फीसदी हिस्से में स्थायी दिव्यांगता हो गई थी। इससे पहले एमएसीटी कोर्ट ने यह कहते हुए उदयपुर एसपी को जिम्मेदारी से मुक्त कर दिया था कि जीप नीलामी में किसी निजी व्यक्ति को बेची जा चुकी है। हालांकि, हाईकोर्ट ने इसे खारिज करते हुए कहा कि जब तक कागजों में नाम ट्रांसफर नहीं होता, तब तक पंजीकृत मालिक ही उत्तरदायी रहेगा।
