जयपुर: राजस्थान के जलदाय विभाग (PHED) में पिछले कुछ दिनों से चल रही निजीकरण की चर्चाओं और कर्मचारी संगठनों के विरोध प्रदर्शन के बीच विभाग ने अपना आधिकारिक रुख स्पष्ट कर दिया है। मुख्य अभियंता (शहरी एवं एन.आर.डब्ल्यू.) देवराज सोलंकी ने एक आधिकारिक पत्र जारी कर स्पष्ट किया है कि विभाग में निजीकरण की न तो कोई नीति बनाई जा रही है और न ही ऐसी कोई नीति प्रस्तावित है।
यह स्पष्टीकरण प्रांतीय नल मजदूर यूनियन (इंटक) द्वारा 13 मार्च को प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन और 6 मार्च को दिए गए मांग पत्र के संदर्भ में जारी किया गया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि शहरी क्षेत्रों में विभाग का समस्त कार्य विभागीय ढांचे के अनुरूप ही संचालित किया जा रहा है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में कार्य ‘जल जीवन मिशन’ के दिशा-निर्देशों के अनुसार हो रहे हैं।
तकनीकी कर्मचारियों की नियमित भर्ती का आश्वासन
कर्मचारी संगठनों की प्रमुख मांग नियमित भर्ती को लेकर भी विभाग ने सकारात्मक संकेत दिए हैं। मुख्य अभियंता ने पत्र में बताया कि तकनीकी कर्मचारियों की नियमित एवं स्थाई भर्ती के लिए विभाग द्वारा निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इस संबंध में आवश्यक कार्यवाही जल्द पूरी कर ली जाएगी, जिससे लंबे समय से स्थाई नौकरी का इंतजार कर रहे युवाओं को राहत मिलेगी।
अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील
विभाग ने कर्मचारी संघों से अपील की है कि वे निजीकरण की भ्रांतियों और अफवाहों पर ध्यान न दें। विभाग का कहना है कि वर्तमान ढांचा पूरी तरह से सरकारी नियंत्रण में है और कर्मचारियों के हितों की रक्षा करना विभाग की प्राथमिकता है। इस आदेश की प्रतिलिपि विशिष्ट सहायक (माननीय मंत्री महोदय, जलदाय विभाग) और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को भी भेज दी गई है।
