जोधपुर डिस्कॉम के निजीकरण की आहट: तीन हिस्सों में बांटने की चर्चा से बिजली कर्मियों में उबाल; श्रमिक संघ ने बजाया रणभेरी

जोधपुर: जोधपुर विद्युत वितरण निगम (JDVVNL) के संभावित निजीकरण और इसे तीन अलग-अलग हिस्सों में विभाजित करने की चर्चाओं ने बिजली विभाग के गलियारों में हलचल मचा दी है। इस मुद्दे को लेकर जोधपुर विद्युत वितरण निगम श्रमिक संघ (BMS) ने कड़ा रुख अपनाते हुए निगम प्रशासन और राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

निजीकरण की चर्चाओं से असुरक्षा का भाव

श्रमिक संघ के अनुसार, विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और समाचार माध्यमों से यह जानकारी सामने आ रही है कि सरकार जोधपुर डिस्कॉम को तीन भागों में बांटकर इसके निजीकरण की प्रक्रिया शुरू कर चुकी है। इस खबर के फैलते ही बिजली कर्मचारियों में अपने भविष्य को लेकर भारी रोष और असुरक्षा की भावना व्याप्त हो गई है।

समझौते के उल्लंघन का आरोप

भारतीय मजदूर संघ (BMS) से संबद्ध इस संगठन ने अपनी प्रमुख आपत्तियों में पूर्व समझौतों का हवाला दिया है। संघ का कहना है कि पूर्व में राज्य सरकार और निगम प्रशासन ने लिखित समझौता किया था कि निगमों में किसी भी प्रकार का निजीकरण नहीं किया जाएगा और न ही कर्मचारियों की सेवा शर्तों में कोई बदलाव होगा। संघ ने स्पष्ट किया कि यदि निजीकरण का निर्णय लिया जाता है, तो इससे हजारों कर्मचारियों के हितों और सेवाओं पर सीधा प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

प्रशासन को अल्टीमेटम

श्रमिक संघ के महामंत्री जनक गहलोत ने इस संबंध में प्रबंध निदेशक (MD) को पत्र लिखकर वर्तमान में फैल रही भ्रांतियों पर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। उन्होंने पत्र में चेतावनी दी है कि यदि निजीकरण की दिशा में कोई भी कदम बढ़ाए गए, तो प्रशासन और सरकार को कर्मचारियों के उग्र विरोध का सामना करना पड़ेगा। संघ का तर्क है कि प्रबंधन और श्रमिकों के बीच मधुर संबंध बनाए रखने के लिए समय रहते स्थिति साफ करना अनिवार्य है।

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