जयपुर: राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा है कि समाज और राष्ट्र को आगे बढ़ाने के लिए आध्यात्मिक चेतना बेहद महत्वपूर्ण है। रविवार, 1 मार्च 2026 को जयपुर में आयोजित जैन इंटरनेशनल ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन (JITO) के टाउन रिप्रजेन्टेटिव नेशनल कॉन्क्लेव एवं विश्व नवकार महामंत्र दिवस 2.0 कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि जैन समुदाय की ‘ध्यान, तपस्या एवं आत्मचिंतन की परंपरा’ ने हमेशा पूरे विश्व का मार्गदर्शन किया है।
मूल्य आधारित नेतृत्व और ‘जियो और जीने दो’ का संदेश

मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान महावीर स्वामी की शिक्षाओं और अहिंसा के मूल्यों के आधार पर जैन समाज ने भारतीय सभ्यता के निर्माण में अतुलनीय योगदान दिया है।
- कर्तव्य बोध सर्वोपरि: उन्होंने जोर देकर कहा कि ‘मूल्य आधारित नेतृत्व, सामाजिक एकता और आध्यात्मिक चेतना’ ही भारत के उज्ज्वल भविष्य की नींव है। हमें अपने हर निर्णय में ईमानदारी, जनसेवा और नैतिकता को प्राथमिकता देनी चाहिए।
- सार्वभौमिक संदेश: जैन दर्शन की प्राचीन ज्ञान परंपरा ने दुनिया को ‘जियो और जीने दो’ का अमर और शांतिपूर्ण संदेश दिया है।
अर्थव्यवस्था में जैन समाज का अहम योगदान

कार्यक्रम में आर्थिक विकास पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के विकास को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए प्रतिबद्ध है और इसमें जैन सहित सभी समाजों की सक्रिय साझेदारी आवश्यक है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत 2047’ के विजन का उल्लेख करते हुए बताया कि 2014 में जो भारतीय अर्थव्यवस्था 11वें स्थान पर थी, वह आज चौथे स्थान पर पहुंच गई है और जल्द ही तीसरा स्थान हासिल करेगी। देश और प्रदेश की इस आर्थिक मजबूती में जैन समाज के उद्यमियों का बहुत बड़ा योगदान है।
नवकार महामंत्र रथों को दिखाई हरी झंडी

मुख्यमंत्री ने ‘नवकार महामंत्र दिवस 2.0’ के अवसर पर कहा कि नवकार मंत्र केवल जैन धर्म तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समस्त मानवता को अहिंसा, करुणा, ज्ञान और आत्मशुद्धि का मार्ग दिखाने वाला एक सार्वभौमिक संदेश है। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने विश्व नवकार महामंत्र दिवस 2.0 के प्रचार-प्रसार के लिए विशेष रूप से तैयार किए गए रथों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस भव्य आयोजन में जीटो (JITO) के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, विभिन्न चैप्टर्स के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में महिला एवं युवा उद्यमी उपस्थित रहे।
