नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत की कड़ी आपत्ति के बाद एनसीईआरटी की नई सोशल साइंस टेक्स्टबुक ‘एक्सप्लोरिंग सोसायटी: इंडिया एंड बियॉन्ड पार्ट 2’ की बिक्री पर रोक लगा दी गई है। इस किताब में ‘द रोल ऑफ द ज्यूडीशियरी इन अवर सोसायटी’ टॉपिक के अंतर्गत न्यायपालिका में भ्रष्टाचार का अध्याय जोड़ा गया था।
CJI की कड़ी टिप्पणी: “मैं खुद देखूंगा यह केस”
बुधवार को सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी ने यह मामला चीफ जस्टिस की बेंच के सामने रखा। इस पर नाराजगी जताते हुए CJI सूर्यकांत ने कहा, “दुनिया में किसी को भी न्यायपालिका को बदनाम करने की इजाजत नहीं दी जाएगी। यह एक सोचा-समझा फैसला लगता है और मैं इस केस को खुद हैंडल करूंगा।” बेंच में जस्टिस विपुल एम. पंचोली और जस्टिस जॉयमाल्या बागची भी शामिल थे।
वकीलों की दलील: ब्यूरोक्रेसी और पॉलिटिक्स पर किताब खामोश
वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने अदालत को बताया कि कक्षा 8 के बच्चों को न्यायपालिका के भ्रष्टाचार के बारे में ऐसे पढ़ाया जा रहा है जैसे यह किसी अन्य संस्थान में है ही नहीं। उन्होंने सवाल उठाया कि किताब में ब्यूरोक्रेसी और राजनीति जैसे क्षेत्रों पर एक शब्द भी नहीं लिखा गया है, केवल न्यायपालिका को ही निशाना बनाया गया है।
विवादित चैप्टर में क्या लिखा है?
एनसीईआरटी की इस नई किताब में पेंडिंग केसों की संख्या का जिक्र करते हुए लिखा गया है कि ‘इंसाफ में देरी, इंसाफ न मिलने जैसा है’। चैप्टर में यह भी दावा किया गया है कि लोग न्यायपालिका के विभिन्न स्तरों पर भ्रष्टाचार का सामना करते हैं, जिससे गरीबों की न्याय तक पहुंच प्रभावित होती है । इसके अलावा, किताब में भ्रष्टाचार से जुड़ी शिकायतों के लिए CPGRAMS सिस्टम और जजों को हटाने के संवैधानिक नियमों का भी वर्णन किया गया है।
वेबसाइट से हटाई गई किताब
23 फरवरी 2026 को जारी हुई यह किताब अब एनसीईआरटी की आधिकारिक वेबसाइट पर मौजूद नहीं है। रिपोर्ट के मुताबिक, ऑफलाइन माध्यम से भी इसकी बिक्री 24 फरवरी से बंद कर दी गई है । यह किताब एकेडमिक सेशन 2026-27 के लिए तैयार की गई थी।
